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गिरोह:मात्र 5 हजार रुपए के लिए दो गैंग में बंटा था भोला पांडेय गिरोह, अनिल शर्मा ने कराई थी सुलह, 4 साल साथ चले

हजारीबागएक महीने पहले
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  • खून के प्यासे दोनों गिरोहों ने कभी साथ काम भी किया था

पांडेय गिरोह और श्रीवास्तव गिरोह के बीच लगातार चला आ रहा वर्चस्व को लेकर गैंगवार की आरंभिक कहानी कुछ और बयां करता है। जानकारी के मुताबिक कभी दोनों एक ही गैंग के सदस्य हुआ करते थे। इस गैंग को भोला पांडेय गिरोह के नाम से जाना जाता था। कोयलांचल क्षेत्र सहित झारखंड के रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, रामगढ़ में भोला पांडेय का एकक्षत्र साम्राज्य था। इसी गैंग का सदस्य सुशील श्रीवास्तव भी था। सुशील श्रीवास्तव का वर्चस्व बोकारो में और भोला पांडेय का वर्चस्व एकीकृत रामगढ़-हजारीबाग में था।

स्थिति ऐसी बनी की सुशील श्रीवास्तव एक मामले में बोकारो जेल गया और उसे पैसे की जरूरत पड़ी। उसने पत्नी को भोला पांडेय के पास 5 हजार रुपए मांगने के लिए भेजा था। भोला पांडेय द्वारा रुपए देने से इनकार किए जाने के बाद सुशील श्रीवास्तव ने अपना अलग गैंग स्थापित करने के लिए थान लिया और दोनों में स्वाभिमान की जंग शुरू हो गई। यहीं से भोला पांडेय गिरोह के नाम से जाना जाता रहा क्रिमिनल गैंग का विभाजन हुआ। एक दूसरे के सदस्यों की हत्या शुरू हुई। 2003-04 में दोनों जेपी कारा में मिले। दोनों में जारी वर्चस्व की लड़ाई को खत्म करने की जिम्मेदारी हाजीपुर जेल में बंद अनिल शर्मा ने उठाया। गैंगस्टर अनिल शर्मा ने हाजीपुर जेल में रहते हुए वर्ष 2003-04 में एक बार फिर से समझौता अपने आदमी के माध्यम से करा दिया। समझौता के बाद 2007 तक दोनों साथ-साथ चलें लेकिन 2007 के बाद सुशील श्रीवास्तव और पांडेय गिरोह एक दूसरे के पॉकेट से रंगदारी वसूलने को लेकर उलझ पड़े और एक बार फिर से दोनों गैंग बंट गया। 2007 के बाद गैंगवार शुरू हुआ।

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