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त्वरित कार्रवाई:खाद की कमी बता हो रही है कालाबाजारी, डेढ़ से दोगुनी कीमत पर बेची जा रही है यूरिया और डीएपी

हजारीबाग3 दिन पहले
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  • कृषि विभाग दावा निकला खोखला, खाद की कालाबाजारी पर नहीं लगी लगाम

जिले में खाद की उपलब्धता और खाद की कालाबाजारी पर त्वरित कार्रवाई करने के संबंध में कृषि विभाग के दावों के बावजूद जिले में खाद की जमकर कालाबाजारी हो रही है। कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए उड़नदस्ता दल बनाने सख्त कार्रवाई की बातों का कोई खौफ नहीं दिख रहा है। ऐसे में किसान अपने खेतों में लगे धान को बचाने के लिए ब्लैक में खाद खरीदने पर मजबूर हो रहे हैं।

कालाबाजारी के कारण धान फसल के लिए किसानों को महंगे दाम पर खाद खरीदना पड़ रहा है। कालाबाजारी की शिकायत जिले के सभी प्रखंडों से आ रही है। ईचाक प्रखंड के बरका कला निवासी मुकेश ने बताया कि कई जगह पता करने के बाद भी उसे यूरिया नहीं मिला तो अंत में एक परिचित दुकानदार से चार सौ के रेट से किसी प्रकार एक बैग यूरिया ले पाया जबकि पैकेट पर मूल्य 266 रुपये प्रिंट था।

हजारीबाग जिले को खरीफ फसल के लिए यूरिया 7250 मैट्रिक टन और डीएपी 5300 मैट्रिक टन आवंटन किया गया है। कागजी आंकड़ों में खाद की शत-प्रतिशत आपूर्ति हो चुकी है। लेकिन यूरिया और डीएपी बाजार में आसानी से नहीं मिल रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में आवंटित खाद कहां गई, यह जांच का विषय है। सरकारी स्तर पर इफको, एनएफएफ, यारा, ग्रासिम, केपीएल ब्रांड का यूरिया का अनुदानित दर 266.50 रुपए प्रति कट्ठा निर्धारित किया गया है। एक कट्ठा में 45 किलो यूरिया रहता है।

उस मुताबिक इसका सरकारी दर 5.92 रुपए प्रति किलो पड़ता है। बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में यूरिया 500 से 600 रुपए प्रति पैकेट बिक रहा है। वही किसानों को खुदरा में 12 से 16 रुपए प्रति किलो खरीदनी पड़ रही है। यही हाल डीएपी का है। डीएपी 50 किलो के कट्टा का सरकारी दर 1200 रुपए निर्धारित किया गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में इफको, एनएफएल, केपीएल, इंडोरामा आईपीएल, पीपीएल ब्रांड का डीएपी 1600 से 1800 रुपए प्रति पैकेट बिक रहा है। डीएपी का सरकारी दर 24 प्रति किलो की जगह कालाबाजारी में 30 से 35 रुपए प्रति किलो बेचा जा रहा है।

कृषि विभाग खाद दुकानों से ईपाॅश मशीन के माध्यम से ही खाद बेचने की बात कह रहा है। लेकिन खाद विक्रेता ई पाॅश मशीन के बिना खाद की बिक्री कर रहे हैं। किसानों को खाद खरीदने पर रसीद भी नहीं दिया जाता है। नियम कायदा कानून बोलने वाले किसानों को खाद उपलब्ध नहीं कह कर लौटा दिया जाता है। जानकारी के अनुसार जिले को आवंटित यूरिया 7250 मैट्रिक टन एवं डीएपी 5300 मैट्रिक टन की पूरी की आपूर्ति हो चुकी है। इसके बावजूद उर्वरक बाजार में सहजता से उपलब्ध नहीं है। जिसके विरुद्ध शत प्रतिशत आपूर्ति हो गई है। अच्छा पैदावार के लिए किसान खेतों में खाद डालते हैं। इसका लाभ कालाबाजारी उठा रहे हैं।

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