भास्कर खास:सड़क पर पड़े कचरे में भोजन ढूंढ़ती हैं गायें, रसोई के अपशिष्ट के साथ खा जाती हैं पॉलिथीन, पड़ रही हैं बीमारी

हजारीबागएक महीने पहले
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  • गोवंश को भोजन का अंश खिलाने की परंपरा शहर में बन रही जानलेवा, गाय के पेट में जमा हो रहा है पॉलिथीन

सनातन और जैन जीवन पद्धति में गोवंश को भोजन का पहला निवाला खिलाने की परंपरा रही है। बहुत से घरों में प्रतिदिन गो ग्रास निकाला जाता है। घर में बनने वाली पहली रोटी गाय को खिला दी जाती है।

किसान भी दीपावली के दूसरे दिन सोहराई पर्व मनाते हैं। इसमें घर के गाय बैल को पांच तरह के अन्न से बना भोजन खिलाया जाता है। उनकी पूजा की जाती है। शहर में रहने वाले लोग जगह की कमी के कारण भी गोपालन नहीं कर पाते लेकिन गो ग्रास निकालने की परंपरा जीवित है।

अब लोग हर दिन गायों को कुछ न कुछ खिला देते हैं। घरों से मिलने वाले भोजन और और सड़क के किनारे रसोई से निकले अपशिष्ट पदार्थ की तलाश में गोवंश मुहल्लों में घूमते हैं। भोजन के लिए सड़कों गलियों में घूमना इनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

गाय, बैल और बछड़े सड़क पर फेंके गए कचरों में भोजन ढूंढते हैं। रसोई घर से पॉलिथीन की थैली में फेंका सब्जी का टुकड़ा और अन्य खाद्य सामग्रियों के साथ गाय पॉलिथीन भी खा जा रही हैं।

पॉलिथीन कोटेड कागज़ और कार्टन भी गाय खा जाती है
पॉलिथीन कोटेड कागज़ और कार्टन भी गाय खा जाती है इस माध्यम से भी पॉलिथीन उनके पेट में पहुंच जाता है। भोजन के साथ पेट के रूमेन में पहुंचा प्लास्टिक नहीं पचता है।

यह पेट के अगले चैंबर में भी नहीं जाता। रुमेन में जमा होता रहता है। इससे सूजन, कमजोरी, पोषण की कमी के कारण दूध घट जाता है और उम्र भी कम हो जाती है।

गायाें के दूध में पहुंच रहा प्लास्टिक का अंश

जीव विज्ञानी डा सत्य प्रकाश हालिया शोध का हवाला देते हुए बताया कि गाय में पॉलिथाईलिन टेरेपथेलेट नामक रसायन मिलता जो सिंथेटिक फैब्रिक और पॉलीमर को तोड़ने और पिघलाने में सहायक है।

इसी के कारण पॉलीमर के मैक्रो मॉलीक्यूल खून से होते हुए दूध तक पहुंच जा रहा है। इससे जेनेटिक बीमारियां पैदा हो रही हैं।

हजारीबाग में शोध के लिए मृत गोवंश की लीवर सैंपल संग्रह करने वाले डॉ विकास गोगई बताते हैं कि शहर में घूमने वाले सभी गोवंश के पेट में पॉलिथीन का कचरा जमा है। पेट से पॉलिथीन को निकालने के लिए सर्जरी एकमात्र उपाय है। पॉलिथीन पर पूर्ण प्रतिबंध से मामले कम होंगे।

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