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सगोष्ठी:सांस्कृतिक क्षति की भरपाई संभव नहीं, हिंदी हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग : मृदुला सिन्हा

हजारीबाग15 दिन पहले
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  • विभावि में हिंदी दिवस पर ऑनलाइन सगोष्ठी

हिंदी विभाग विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग और विश्व संस्कृत हिंदी परिषद नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय एकता में हिंदी का प्रदेय विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी आयोजित की गई। एक दिवसीय तरंग गोष्ठी दो सत्रों में संपन्न हुई। प्रथम सत्र की अध्यक्षता विभावि के कुलपति डॉ मुकुल नारायण देव और दूसरे सत्र की अध्यक्षता बाबा मस्तराम विश्वविद्यालय रोहतक हरियाणा के कुलपति डॉ राम सजन पांडे ने किया। इस आयोजन के संयोजक हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ शारदा शर्मा ने स्वागत संबोधन किया। गोवा की पूर्व राज्यपाल एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मृदुला सिन्हा ने प्रथम सत्र के उद्घाटन वक्तव्य में राष्ट्र की संकल्पना को स्पष्ट करते हुए कहा कि देश भौगोलिक इकाई है तो राष्ट्र सांस्कृतिक इकाई।

भौगोलिक क्षति की पूर्ति तो की जा सकती है किंतु सांस्कृतिक क्षति की भरपाई संभव नहीं है। हिंदी हमारी संस्कृति का अंग है जिसके बिना राष्ट्रीय एकता की बात तो बेमानी है। डॉक्टर नीलू गुप्ता ने अमेरिका में बढ़ते हिंदी प्रेम और भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए हिंदी की सरलता और सहजता को सामने रखा। मणिपुर विश्वविद्यालय इंफाल के हिंदी विभाग की शिक्षिका डॉक्टर कंचन शर्मा ने पूर्वोत्तर में हिंदी के प्रचार-प्रसार का ब्योरा देते हुए कहा कि हिंदी को पद दिलाने और राष्ट्रीय एकता को कायम रखने के लिए हिंदी के प्रति आस्था तथा निष्ठा आवश्यक है। विश्व भारती शांति निकेतन की पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ मंजू रानी सिंह ने भारत की सांस्कृतिक एकता के लिए हिंदी भाषा की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा कि बंगाल के विद्यार्थी हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में सम्मान देते हैं। प्रथम सत्र का मंच संचालन डॉक्टर सुबोध सिंह शिव गीत और धन्यवाद ज्ञापन डॉ प्रेम रंजन भारती ने किया विषय प्रवेश डॉ केदार सिंह ने कराया।

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