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जांच कराने की मांग:राज्य में व्याप्त सभी अनियमितताओं को लेकर पीएमओ सीएमओ, राज्यपाल और मानवाधिकार आयोग को पत्र

हजारीबाग19 दिन पहले
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  • पत्र की कॉपी सीएमओ झारखंड के राज्यपाल हेल्थ सेक्रेट्री और मानवाधिकार आयोग को भी भेजा

हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर चोरी, रेमेडीसिविर का कालाबाजारी व आउटसोर्स एजेंसी सोलंकी में भारी अनियमितता के संबंध में समाजसेवी डॉ आनंद शाही ने पीएमओ को पत्र लिखकर पांच बिंदुओं पर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। पत्र की कॉपी सीएमओ झारखंड के राज्यपाल हेल्थ सेक्रेट्री और मानवाधिकार आयोग को भी भेजा है। कहा है कि अब तक की जांच से बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश और इतने दिनों का वक्त कर्मियों को जांच टीम के द्वारा दिया जाना साक्ष्य छुपाने का अवसर देना प्रतीत हो रहा है। इसलिए इस गंभीर मामला की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ हीं जांच तक संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाया जाय। ताकि वे साक्ष्य मिटाने की कोशिश ना कर सकें।

पत्र में कहा है कि हजारीबाग शेख भिखारी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में कोविड 19 के समय बहुत सारी घटनाएं मेडिकल कालेज के कर्मियों के मिलीभगत से किया गया है,जो अमानवीय एवं मानवाधिकार का हनन है । जहां पूरी दुनियां वैश्विक महामारी से लड़ रही थी वहीं पर मेडिकल कालेज के कर्मी मानवता को शर्मसार कर ऑक्सीजन सिलेंडर और रेमेडीसिविर वैक्सीन की कालाबाजारी में संलिप्त थे, जो जांच का विषय है। जिन पांच बिन्दुओं का उल्लेख किया है उनमें कहा है कि आक्सीजन सिलेंडर चोरी होने के मामले में एसआईटी टीम ने बारह दिनों में खुलासा नहीं कर पाया है, सिर्फ सिलेंडर जुटाने में लगी रही जो दोषी को कहीं ना कहीं बचाने का प्रयास है । अगर सिलेंडर हास्पिटल से बाहर नहीं गए थे तो इसे खोजने में इतने दिन कैसे लगे। अब यह कहा जाना कि बड़े सिलेंडर अस्पताल से मिले हैं यह जांच को संदिग्ध बताया है।

छोटे मछली को बलि का बकरा बनाए जाने की कोशिश है जबकि इसमें कई रसूखदारों के यहां सिलेंडर होने की बात आ रही है। कहीं ना कहीं जांच एक खानापूर्ति प्रतीत हो रहा है। आउटसोर्स कंपनी एमजे सोलंकी में बहाल किए गए कर्मचारियों का फिजिकल वेरीफिकेशन किया जाए कि वे हैं कौन? जानकारी के मुताबिक कंपनी का सारा मेनेजमेंट मेडिकल कॉलेज के प्रधान लिपिक राकेश कुमार सिंह के रिश्तेदार निशा भारती के जिम्मे है। जबकि एजेंसी का मानिटरिंग लिपिक के हाथों में है। इसमें सारे कर्मी स्वास्थ्यकर्मियों के बेटे भाई, भतीजे साला भांजा और उनके घरों में काम करने वाले नौकर बहाल हैं। कोरोना काल में रेमडिसिविर दवा की आपूर्ति होने पर स्टाक किसके नियंत्रण में था। इसकी कालाबाजारी का सूत्रधार कौन है। क्या जिन भर्ती मरीजों के नाम पर दवा स्टोर से निर्गत हुआ क्या उन्हें दवा लगाया गया था? इन सारे तथ्यों को क्या उजागर किया जा सकेगा जिनके गुनाहों के कारण किसी के सिर से माता पिता का सहारा छिन गया, किसी का सुहाग उजड़ गया तो किसी का संतान दुनिया से चला गया? क्या इस आपदा की घड़ी में मानवीय संवेदनाओं को दरकिनार कर कालाबाजारी कर संक्रमितों के जीवन से खेलना मानवाधिकार का हनन नहीं है? कहा है कि इसकी उच्चस्तरीय जांच हो तो बड़ा खुलासा होगा।

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