डॉक्टर्स डे पर विशेष / घर और बच्चों से दूर रहकर बचा रहे कोरोना मरीजों की जिदंगी

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  • हजारीबाग जिले के चार डॉक्टरों की कहानियां... जिन्होंने अपनी परवाह नहीं की, लोगों की सेवा को महत्वपूर्ण माना

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

हजारीबाग. हजारीबाग में कोरोना योद्धाओं के हौसले काफी बुलंद है। इन्हीं के अथक प्रयास से काेराेना जैसे वैश्विक महामारी से हजारीबाग के करीब 135 मरीज स्वस्थ हाेकर अपने घर जा चुके हैं। इनका दिनचर्या भी इन मरीजाें के इलाज के साथ ही शुरू हाे रहा है। काेराेना महामारी में ये अपने घर-परिवार और बच्चाें की चिंता छाेड़ मरीजाें की सेवा में जुटी हैं। इस दाैरान कई चिकित्सक इस बीमारी से ग्रसित हाे गए हैं। पर इसकी परवाह किए बिना ही ये मरीजाें के इलाज में जुटे हुए हैं। वर्ल्ड डाॅक्टर डे पर ऐसे चिकित्सकाें ने भास्कर से साझा की अपनी बात...

कर्तव्य... घर परिवार छोड़ कोरोना संक्रमितों की इलाज में जुटी हैं
महिला चिकित्सक डॉक्टर स्मिता प्रियदर्शनी निरंतर कोरोना संक्रमण के इलाज में जुटी हैं। बातचीत में उन्होंने कहा कि पिछले तीन माह से मैं अपने माता-पिता और परिवार के लोगों से नहीं मिली हूं। मेरे पति पीयूष कुमार सैंगर भी हजारीबाग में डॉक्टर हैं। मेरी सास गीता सैंगर धनबाद में डॉक्टर है।

मेरा एक तीन साल का बेटा है पति और सासू मां का लगातार सहयोग और साहस कोरोना  से लड़ाई में हिम्मत बनाता रहा। जब कोरोना  ने अपना पहला कदम रखा था तो हम काफी डरे हुए थे, लेकिन जैसे-जैसे संक्रमितों  की संख्या बढ़ती गई उनसे फेस करते रहे। हिम्मत बढ़ती गई और अब बस यही एक मन में जिज्ञासा होती है कि संक्रमित मरीज को हम जल्द से जल्द ठीक करें और वह जल्दी अपने घर को चले जाएं।

निष्ठा... बरही में कोरोना काे नियंत्रित करने मे अहम योगदान
बरही अनुमंडलीय अस्पताल में नोडल पदाधिकारी डॉक्टर प्रकाश ज्ञानी कोरोना काल में अपनी जान की परवाह किए मरीजों की सेवा में लगे हैं । कोरोना काल में उनकी दिनचर्या सुबह 6:00 बजे से शुरू होती है और रात के 11:00 बजे समाप्त होती है ।  सुबह 6 बजे उनके निवास स्थान पर कोरोना से संबंधित परामर्श लेने वालों की भीड़ लगती है। सोशल डिस्टेंसिंग मेनटेन करते हुए सभी को परामर्श देना उनके दैनिक दिनचर्या में शामिल है।  डॉ. ज्ञानी की पत्नी डॉ. संगीता चौधरी, पुत्र डॉ संकल्प ज्ञानी एवं पुत्री डॉ. सुमेधा ज्ञानी सभी डॉ ज्ञानी के समर्पण से काफ़ी खुश है। डॉ संगीता चौधरी कहती हैं कि डॉ ज्ञानी 1994 में बरही के गौरियाकरमा में पदस्थापित हुए।

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