भास्कर ब्रेकिंग:हजारीबाग में अब टेंडर घोटाला, अफसरों और कर्मचारियों ने मां, भाई और चहेतों को दे दिया 250 करोड़ रुपए का ठेका

हजारीबागएक महीने पहलेलेखक: उमेश राणा
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  • पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल हजारीबाग में वित्तीय अनियमितता के बाद अब नया फर्जीवाड़ा
  • मंत्री बाेले- दोषियों पर कार्रवाई होगी, वर्षों से जमे अफसर-कर्मियों काे हटाएंगे

पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल हजारीबाग में घाेटाले की परत दर परत खुल रही है। विभाग में कराेड़ाें की वित्तीय हेराफेरी का खुलासा के बाद अब कराेड़ाें रुपए का टेंडर घोटाला सामने आया है। इस घोटाले के केंद्रबिंदु में भी वही चेहरे हैं, जिन्हें रांची की चार सदस्यीय विभागीय जांच टीम ने दाेषी पाया था और कार्रवाई की अनुशंसा की है।

नया मामला यह है कि काेराेना काल में 100 से अधिक कार्याें के लिए 310 कराेड़ के टेंडर हुए। इनमें से 53 अभी एलाॅट भी कर दिए गए हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, विभाग के अधिकारियाें और कर्मचारियाें ने 250 कराेड़ रुपए का ठेका मां, भाई और चहेतों काे दे दिया है।

तीन केस स्टडी से समझें... कैसे हुआ टेंडर देने में घपले का खेल

  • 1. मेसर्स सूर्यदेव प्रसाद गुप्ता को कार्यादेश संख्या 219 व 237 तारीख 25 अक्टूबर 21 के तहत हजारीबाग और 23 अक्टूबर काे वर्कऑर्डर नंबर 164, 173 व 176 से झुमरीतिलैया में एक करोड़ से ज्यादा के कार्य आवंटित किए गए हैं। चाैपारण के रहने वाले सूर्यदेव विभाग के हजारीबाग अंचल में पदस्थापित लेखा लिपिक ब्रजमोहन कुमार के भाई हैं।
  • 2. मेसर्स सरस्वती इंटरप्राइजेज को 58.65 लाख रुपए का टेंडर दिया गया है। सरस्वती देवी लेखा लिपिक मनोज कुमार की मां हैं। मनोज कुमार भी विभाग के हजारीबाग प्रमंडल में पदस्थापित हैं। सरस्वती इंटरप्राइजेज उनकी मां के नाम से रजिस्टर्ड है।
  • 3. सर्विस प्राेवाइडर फर्म कुंजल कुशवाहा के नाम पर कई टेंडर डाले गए हैं। उसे लाखाें का ठेका मिला है। कुंजल का जीएसटी नंबर 20 सीपीजीपी के 4430 पी2जेडयू है। इसी जीएसटी नंबर पर फर्जी तरीके से 1.32 करोड़ का भुगतान किया गया है। जांच टीम ने इस फर्जीवाड़े को पकड़ा था और कार्रवाई की अनुशंसा की है। कुंजल हजारीबाग के पूर्व कार्यपालक अभियंता मार्कंडेय कुमार राकेश का करीबी है।

ये नियम: सरकारी कर्मी के करीबी काे टेंडर नहीं

झारखंड पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट कोड-160 के तहत “नो टेंडर शुड बी एक्सेप्टेड फ्रॉम एनी पर्सन डायरेक्टली ऑर इनडायरेक्टली कनेक्टेड विद गवर्नमेंट सर्विस’, यानी सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्ति से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े किसी भी व्यक्ति से कोई भी निविदा स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। इसके बावजूद रिश्तेदारों के नाम कराेड़ाें का ठेका दे दिया गया।

हुआ ये: 10% तक रेट कम डाल टेंडर मैनेज किया

विभागीय जानकाराें के अनुसार, एक ही जगह पर 15 साल से जमे अधिकारियों और कर्मचारियों ने ठेकेदाराें से मिलकर यह बड़ी हेराफेरी की है। टेंडर मैनेज करने के बाद कार्यों का जब आवंटन कर दिया गया तो ठेकेदारों से राशि की वसूली की जाती है। सबसे बड़ी बात यह कि सात प्रतिशत से 10 प्रतिशत रेट कम डालकर टेंडर मैनेज किया जाता है, ताकि दूसरे आवेदकों को ठेका नहीं मिल सके।

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