काेराेना इफेक्ट:राेजी-राेटी की चिंता ने बचपन छीना, 16 जिलाें में 8वीं तक के 1.42 लाख बच्चे हाे गए पढ़ाई से दूर

हजारीबाग10 महीने पहले
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काेराेना बच्चाें की शिक्षा पर काल बनकर टूटा है। झारखंड के सरकारी स्कूलाें में पढ़ने वाले पहली से आठवीं कक्षा के बच्चे बड़ी संख्या में ड्राॅपआउट हाे चुके हैं। काेराेना से पहले शिक्षा विभाग के लिए 100 प्रतिशत बच्चाें काे स्कूलाें से जाेड़ना समस्या थी। अब पढ़ाई छाेड़ चुके बच्चाें काे तलाशना बड़ी चुनाैती बन गई है।

राज्य में पहली से आठवीं तक के स्कूल खाेले जाने की तैयारी चल रही है। ऐसे में भास्कर की 7 टीमाें ने 16 जिलाें के सरकारी स्कूलाें में पहली से आठवीं तक के बच्चाें का हाल जाना ताे चाैंकाने वाले आंकड़े आए। इन जिलाें में काेराेना से पूर्व पहली से आठवीं तक 18,48,384 बच्चे स्कूलाें में थे। इनमें से 1,42,097 बच्चे पढ़ाई छाेड़ चुके हैं। यानी 7.69 प्रतिशत। गरीबी, घर की समस्या और राेजी-राेटी की चिंताओं ने ऐसे बच्चाें से बचपन छीन लिया। भास्कर टीम ने जब ग्राउंड पर जाकर हकीकत देखी ताे एेसे बच्चे कहीं सब्जी बेच रहे थे ताे काेई हाेटल में काम कर रहा था ताे काेई जंगली फल चुन रहा था। अब शिक्षा विभाग ने लहर एप से बच्चाें की ट्रेसिंग और ट्रैकिंग करने का फैसला लिया है।

लाॅकडाउन से आर्थिक स्थिति बिगड़ी ताे सब्जी बेचने काे मजबूर

हिमांशु कुमार सरस्वती शिशु विद्या मंदिर जयनगर में पांचवीं का छात्र है। हिमांशु ने कहा-लाॅकडाउन में पिता का कामकाज ठप हाे गया। स्कूल भी बंद था, ताे हमने पिता के काम में हाथ बंटाना शुरू कर दिया। अब हमदाेनाें काम कर रहे हैं। मैं सब्जी की दुकान संभालता हूं और पिता मजदूरी करते हैं।

जंगली फल चुनकर लाते हैं, उसी काे बेचकर चलता है घर

ये हैं नवादा गांव के बाेंगादाग टाेला निवासी सचिन उरांव और आकाश कुमार। दाेनाें दूसरी कक्षा के छात्र हैं। लाॅकडाउन में काम बंद हुआ ताे राेजी-राेटी का संकट खड़ा हाे गया। ऐसे में परिवार काे जंगल का सहारा लेना पड़ा। वे दाेनाें जंगल से सरई चुनकर लाते हैं। माता-पिता उसे बेचकर गुजारा करते हैं।

स्कूल बंद हुए ताे छूट गई पढ़ाई, अब हाेटल में बेच रहा समाेसे

नावाडीह के सदपा गांव का राहुल कुमार आठवीं का छात्र है। राहुल ने कहा-काेराेना के कारण स्कूल बंद हुए ताे पढ़ाई छूट गई। लाॅकडाउन के बाद दुकानें खुलीं ताे पिता के साथ काम करने लगा। अब पढ़ाई से नाता टूट चुका है। मैंने समाेसे और नाश्ते का आइटम्स बनाना सीख लिया है।

पलामू टाॅप पर, 20 हजार से ज्यादा बच्चे स्कूलाें से दूर

गुमला 1587 82,500 16,556 पलामू 2499 2,40,000 20202 गढ़वा 1421 1,42,697 2934 खूंटी 385 82,445 19,468 चतरा 1570 1,42,804 1854 सिमडेगा 722 80,178 1569 रामगढ़ 586 60,000 2534 लातेहार 1057 83,909 6700 लोहरदगा 502 61,000 16070 हजारीबाग 1474 1,23,202 8850 कोडरमा 659 65,344 17419 बोकारो 1453 1,20,505 2349 गिरिडीह 3189 2,18,471 18779 जामताड़ा 1030 92,583 2210 प. सिंहभूम 2056 1,45,746 2253 सरायकेला 1420 1,07,000 2350

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