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शिक्षक दिवस:निष्ठा व ईमानदारी से बच्चों को पढ़ाएं शिक्षक : प्रोवीसी

हजारीबाग14 दिन पहले
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पुस्तक का विमोचन करते मुख्य अतिथि और अन्य। - Dainik Bhaskar
पुस्तक का विमोचन करते मुख्य अतिथि और अन्य।
  • डीएवी में शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन, पुस्तक छायावाद का शताब्दी वर्ष का विमोचन

डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में एक दिन बाद शिक्षक दिवस समारोह आयोजित किया गया। आयोजन में स्कूल के शिक्षकों को सम्मानित करने के साथ स्कूल के वरीय हिंदी शिक्षक डॉ बलदेव पांडे की पुस्तक का विमोचन किया गया। मुख्य अतिथि विनोबा भावे विश्व विद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ अजित कुमार सिन्हा ने स्कूल के प्राचार्य अशोक कुमार सहित सभी शिक्षकों सम्मानित किया।

प्रो सिन्हा ने शिक्षकों से अपील की कि आप भविष्य निर्माता हैं। पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ शिक्षण कार्य करें, उनमें देशप्रेम की भावना विकसित करें। बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करें। उन्होंने छायावाद का शताब्दी वर्ष पुस्तक के लेखक बलदेव पांडे को भी शुभकामना दी।

शिक्षक दिवस समारोह को संबोधित करते हुए प्राचार्य अशोक कुमार ने कहा कि माता-पिता बच्चों के पहले शिक्षक होते हैं जो बच्चों को जीवन के मूल्यों का बोध कराते हैं। इसके बाद गुरु और शिक्षक बच्चों को आगे का मार्ग प्रशस्त करते हैं। एक काबिल इंसान बनाने के साथ-साथ जीवन का पाठ शिक्षक ही पढ़ाते हैं।

उन्होंने 3सी कनेक्ट, कन्वे और कन्वेंस के फार्मूला को बताया। कहा कि बच्चों की प्रतिभा की परख और उनकी प्रतिभा को आकार देना एक शिक्षक का ही काम होता है।समारोह में बतौर सम्मानित अतिथि के रूप में बैंक आफ इंडिया के जोनल मैनेजर सैयद असद मेंहंदी, ब्रांच मैनेजर आलोक रंजन एवं एचडीएफसी के वाइस प्रेसीडेंट सौरभ रंजन, ब्रांच मैनेजर निशांत आंशु सहित अन्य शामिल थे। समारोह की अध्यक्षता विनोबा भावे विश्व विद्यालय के इंग्लिश विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो यमुना प्रसाद ने की। सभी शिक्षकों को उपहार के साथ पौधा प्रदान किया गया। मंच संचालन अनुष्का राठौर एवं ऋषा प्रदान किया। धन्यवाद ज्ञापन स्कूल के हेड बॉय यश राज ने दिया।

पुस्तक के बारे में : डीएवी के शिक्षक डॉ बलदेव पांडे की पुस्तक छायावाद का शताब्दी वर्ष में छायावाद का पुनर्मूल्यांकन किया गया है। इसमें छायावाद से संबंधित 28 लेख है। हिंदी कविता के लेखन में छायावाद को समझने के लिए पुस्तक बेहतर साबित होगी। इसमें छायावाद के चार स्तंभ लेखकों की रचनाओं पर विस्तृत दृष्टिपात किया गया है। पुस्तक को प्रलेक प्रकाशन ने छापा है कीमत ₹300 निर्धारित है।

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