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  • The Distance From Parasnath Station To Madhuban Is 14.5 Km, Due To Lack Of Funds Till Date The Highest Pilgrimage Of The Jain Community Could Not Be Connected To The Railroad

सर्वोच्च तीर्थ:पारसनाथ स्टेशन से मधुबन तक की दूरी 14.5 किमी, फंड के अभाव में आज तक रेलमार्ग से नहीं जुड़ पाया जैन समुदाय का सर्वोच्च तीर्थ

हजारीबाग2 महीने पहलेलेखक: उमेश राणा
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4 मार्च 2019 को शिलान्यास के मौके पर मौजूद लोग। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
4 मार्च 2019 को शिलान्यास के मौके पर मौजूद लोग। (फाइल फोटो)
  • मधुबन को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए 27 वर्षों से हो रहा है प्रयास, 4 मार्च 2019 को स्थानीय सांसद, विधायक और डीआरएम ने रखी थी आधारशिला

फंड के अभाव में जैन धर्म का सर्वोच्च तीर्थ स्थल मधुबन पारसनाथ रेलमार्ग से नहीं जुड़ पाया। विगत 4 मार्च 2019 को रेल लाइन की इस कनेक्टिविटी की आधारशिला रखी गई थी। आधारशिला, पारसनाथ रेलवे स्टेशन के पास स्थानीय सांसद रविंद्र कुमार पांडे, विधायक जगन्नाथन महतो, निर्भय कुमार शाहाबादी और धनबाद के डीआरएम की मौजूदगी में रखी गई थी।

इस दिशा में हजारीबाग के कमल जैन विनायक ने काफी प्रयास किया और संबंधित विभाग में पत्राचार कर लोगों का ध्यान आकृष्ट कराते रहे। मधुबन को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए वे पिछले 27 वर्षों से प्रयास कर रहे हैं। बताया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा फंड आवंटित नहीं किए जाने के कारण मधुबन को रेल मार्ग से जोड़ने का काम अभी तक प्रारंभ नहीं हो पाया है। शुरुआती स्तर पर पारसनाथ स्टेशन से मधुबन तक का रेल मार्ग 14.5 किलोमीटर ही है।

केंद्रीय मंत्री से की आवंटन की मांग
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल से पूरे भारतवर्ष के जैन समाज ने अपील की है कि केंद्र सरकार से अतिशीघ्र फंड का आवंटन करा कर इस चिर प्रतीक्षित मांग को पूरी कराई जाए। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल 18 नवंबर को मधुबन पहुंचे थे। मुनि प्रमाण सागर जी महाराज हजारीबाग के हैं और आज की तारीख में वे पूरी दुनिया में ज्ञान और विज्ञान का लोहा मनवा रहे हैं। शंका समाधान के जरिए भारत देश में वे काफी लोकप्रिय हो चुके हैं और उन्हीं की प्रेरणा से पूरे भारतवर्ष के जैन समाज ने मधुबन को रेल मार्ग से जोड़ने की अपील भारत सरकार से किया है।

तीर्थंकर को रेलमार्ग से जोड़ने की अपील
जैन धर्म के 24 तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ जो विश्व वंदनीय है, उन्होंने यहीं पर मोक्ष की प्राप्ति की थी। 20 तीर्थंकरों का निर्वाण मोक्ष सम्मेद शिखर में ही हुआ है। यही कारण है कि मधुबन दुनिया भर के जैन धर्मावलंबियों की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। दुनियाभर के जैनियों के लिए यह सर्वोच्च तीर्थ स्थल है और इसी कारण मधुबन को रेल मार्ग से जोड़ने की अपील दुनियाभर के जैन समुदाय के लोग भारत सरकार से कर रहे हैं। 24 वें तीर्थंकर के मोक्ष स्थल तक आने जाने में करीब 27 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है।

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