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  • The Third Eye Of The Police Closed In The City, Out Of 273 CCTV Cameras At The City Squares, 260 Have Been Completely Damaged, Chain Snatching Incidents Have Increased

कैसे होगी निगरानी:शहर में पुलिस की तीसरी आंख बंद, शहर के चौक-चाैराहों पर 273 सीसीटीवी कैमरों में से 260 पूरी तरह से हो चुके हैं खराब, बढ़ गई है चेन स्नैचिंग की घटनाएं

हजारीबाग20 दिन पहले
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  • रख रखाव के बिना पड़े हैं खराब कैमरे, निजी सीसीटीवी के भरोसे अपराधी तक पहुंचने की होती है कोशिश, विभाग के मुताबिक 20 भी ठीक नहीं

जिला को अपराधियों से मुक्त करवाने के लिए पुलिस प्रशासन ने हर चौक चौराहे, गली में अपनी तीसरी आंख (सीसीटीवी कैमरे) भी लगाई थी। मगर यह तीसरी आंख सिर्फ बड़े त्योहारों एवं बड़े कार्यक्रम के समय ही खुलती है और बाकी समय लगभग बंद ही रहती है। इसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं। दिनदहाड़े घटना को अंजाम दे रहे हैं। चेन स्नैचर खुलेआम स्नैचिंग की घटना को अंजाम दे रहे हैं। महिलाएं घूमने फिरने में असुरक्षित महसूस कर रही हैं। जो भी बड़ी घटनाओं का फुटेज मिलता है उसमें पुलिस प्रशासन के अलावा आम जनता के द्वारा लगाए गए कैमरे का फायदा मिलता है। अधिकतर कैमरे बंद पड़े हैं। रख-रखाव के अभाव में सभी की स्थिति जर्जर हो गई है। यह सीसीटीवी कैमरे बीते पांच वर्ष पूर्व लगाए गए थे। पिछले कई महीनों से शहर के कई आपराधिक घटनाएं हो रही है, जिसका खुलासा करने में फुटेज के अभाव में हजारीबाग पुलिस नाकाम रही है। संपूर्ण शहर के चौक -चाैराहों पर कुल 273 कैमरे लगे है, जिसमें 260 अंधे हो चुके है और कुछ के लेंस खराब हो गये। विभागीय आकड़ों की माने तो 20 कैमरे भी ठीक नहीं हैं।

विधायक मद से 20 लाख खर्च कर लगाए गए थे शहर में सीसीटीवी

विधायक मनीष जायसवाल के सौजन्य से शहर को सीसीटीवी से लैस किया गया था। उन्होंने अपने विधायक फंड से 20 लाख रुपए सीसीटीवी लगाने के लिए जिला प्रशासन को दिया था। उसी लागत से शहर में सीसीटीवी लगाए गए। बाद में भारत संचार निगम लिमिटेड(बीएसएनएल) ने शहर के विभिन्न चौक-चाैराहों पर लगभग 117 कैमरे लगाये। जिसका करार एक वर्ष के लिए हुआ था। कैमरे की लागत और मरम्मत के लिए जिला पुलिस प्रशासन ने एक साल के लिए 1करोड़ 20 लाख रुपए में करार किया था, जिसमे 49 लाख अभी भी बकाया है ।

इसके अलावा भारत संचार निगम लिमिटेड(बीएसएनएल) ने बैंडविथ डाटा कनेक्शन जो लाइव सर्विस मुहैया करवाता है इसका एक करोड़ से ऊपर बकाया है। एनुअल मेंटनेंस सर्विस रिन्यूवल नहीं होने के वजह से तीसरी आंख अंधी हो गई है। बताया जाता है कि शहर में लगे सीसीटीवी कैमरे वर्तमान में मुफ्त में चल रहा था। आलम यह है कि कहीं कैमरे में बैट्री नहीं है तो, किसी में बिजली का कनेक्शन नहीं है या फिर किसी का वायरिंग ही गड़बड़ है।

5 वर्षों से शहर के 473 स्थान चिह्नित, कैमरे का है इंतजार
शहर के 473 स्थान को सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए चिंहित किया गया है। उक्त कैमरों के लिए 5 करोड़ की लागत से लगने वाले कैमरे की खरीदारी और लगाने के लिए योजना भी तैयार कर ली गई है। लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण कैमरे की खरीदारी पर ताला लटक गया है। विभाग की ओर से 60 एएनपीआर कैमरे, 92 - वेरी फोकल 467 कैमरे और 54 पीटीजेड कैमरों की आवश्यकता है।

शहर के सभी कैमराें काे किया जाएगा अपग्रेड : एसपी
एसपी मनोज रतन चौथे ने बताया कि कैमरे को अपग्रेड करने के लिए उपायुक्त से जल्द ही बैठक की जाएगी। विभाग ने इसके लिए योजना बनाने की पहल शुरू कर दी है। बंद पड़े कैमरों को जल्द ही ठीक कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरे के सहारे कई बड़ी घटनाओं का सफल अनुसंधान किया गया है। नगर निगम से इस सिलसिले में जल्द बात की जाएगी।

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