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सरलता का भाव:पर्यूषण महापर्व का तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया

झुमरीतिलैया8 दिन पहले
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दशलक्षण पर्यूषण महापर्व तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया। मौके पर रविवार प्रातः विश्व शांति मंत्रों के साथ मंत्रित जल से अभिषेक दोनों जैन मंदिर में किया गया। मौके पर उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन देते परम विदुषी आरिका 105 सौभाग्य मति माताजी ने कहा कि छल कपट से दूर रहने वाला मनुष्य ही सुखी रहता है।

उन्होंने कहा कि अपने जीवन में सरलता का भाव लाना ही आर्जव धर्म है, जीवन में हमेशा प्रसंता के रथ पर सवार होने और प्रसन्न रहने के लिए उत्तम आर्जव धर्म को अपनाना होगा। उन्होंने धर्म के मार्ग में अपने इस बहुमूल्य जीवन को लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव का संसार में जन्म छल, कपट, धोखा देने के लिए नही हुआ है, अपितु उनका जन्म सार्थक करने के लिए हुआ है।

इसलिए अपने जीवन में उत्तम आर्जव धर्म को अपनाएं और सरल बनते हुए व्यवहारिक बने। नया जैन मंदिर में प्रथम अभिषेक व शांतिधारा का सौभाग्य प्रदीप छाबड़ा के परिवार को मिला। वहीं बड़ा जैन मंदिर के मुलवेदी पर नंद-हेमंत बड़जात्या, 1008 पद्मप्रभु भगवान का मनोज जैन चूड़ीवाला, भगवान का मंगल विहार व प्रथम अभिषेक सुभाष, कुणाल जैन ठोल्या और विशेष माता जी के मुखर बृंद से अभिषेक शांतिधारा सुरेन्द जैन काला को प्राप्त हुआ। वहीं शाम में आरती सुनील जैन लुहाड़िया के परिवार के द्वारा किया गया। मौके पर जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन, राजकुमार अजमेरा सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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