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मुखिया ने कहा:सरकार निकाल दे चिट्ठी; अब धान नहीं लेंगे, किसान बाजार में बेचेंगे

कांडी2 महीने पहले
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इस वर्ष के जैसा खरीफ की महत्वपूर्ण फसल धान पैदा करके लगातार छह महीने तक किसान को कभी रोना नहीं पड़ा था। ऐसी दुर्गति किसानों ने पूरी जिंदगी में कभी नहीं झेली थी। जो तथाकथित गरीब, मजदूर एवं किसानों की सरकार ने झेलने के लिए मजबूर कर दिया। कांडी पंचायत के निवर्तमान मुखिया सह कार्यकारी समिति के प्रधान भाजपा नेता विनोद प्रसाद ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए उक्त बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि नवंबर महीने में इस इलाके में धान की कटनी शुरू हो जाती है। कटनी के साथ ही धान की दौनी भी शुरू हो जाती है। और उसी समय से धान बेचने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। अगर आप दिमाग पर जोर देंगे तो धान की कटाई शुरू हुए 7 महीने हो चुके हैं। इस बीच रबी की एक फसल की बुवाई से लेकर कटाई व दंवाई तक समाप्त हो गया। लेकिन किसानों की दुर्गति है कि अभी तक धान क्रय केंद्र पर उनके धान की खरीदारी नहीं हो सकी है।

जिन किसानों ने सरकारी दर के लालच में खून पसीने से कमाई गई फसल को बेचने की गरज में रखा है। सबसे बड़ी बात है की धान क्रय केंद्र के अधिकारी की चमड़ी इतनी मोटी है कि लगातार समाचार माध्यमों में लिखे जाने एवं उनकी करनी कुकरनी लगातार उजागर किए जाने के बाद भी उनके ऊपर रंच मात्र भी असर नहीं पड़ता। पिछले साल कांडी के उसी छोटे गोदाम में पूरे प्रखंड के धान की खरीदारी हो गई थी।

इस बार इतना नाटक किया गया कि जिसकी कोई सीमा नहीं है। तारीफ की बात तो यह है कि धान की बेहतर पैदावार के लिए प्रसिद्ध कांडी प्रखंड में अभी तक धान की खरीद के लिए पर्याप्त जगह वाला गोदाम का निर्माण नहीं हो सका है। इसका नतीजा है कि गोदाम का बहाना बनाकर क्रय केंद्र अधिकारी कांडी का धान बरडीहा प्रखंड में मंगवाने लगे हैं। कुछ धान लमारी कला निवासी प्रसिद्ध नारायण सिंह के निजी आवास में फेंका हुआ है। आखिर प्रखंड मुख्यालय कांडी में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तत्काल के लिए कोई अन्य भवन क्यों नहीं उपलब्ध कराया गया।

निवर्तमान मुखिया ने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार चिट्ठी निकाल दे। जिसमें स्पष्ट उल्लेख हो कि अब और कोई धान नहीं खरीदा जाएगा। जिसको जहां जैसे बेचना हो धान की बिक्री करें। इस हालत में ओने पौने दाम पर धान बेचकर किसान कम से कम फारीग तो हो जाता। उन्होंने कहा कि धान की कटनी होने के साथ ही खलिहान में से जिसने औने पौने दाम पर जिसने धान बेच दिया था। उसी ने होशियारी की थी।

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