नवरात्र:मां भद्रकाली मंदिर में 54 कलश की स्थापना

इटखोरी10 दिन पहले
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  • मंदिर के गर्भ गृह में सरकारी तौर पर सबसे पहले प्रधान कलश स्थापित किया गया

मां भद्रकाली मंदिर में गुरुवार को शारदीय नवरात्र के मौके पर 54 कलश स्थापित किया गया। माता की शृंगार पूजन के बाद मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा मंदिर के गर्भ गृह में सरकारी तौर पर सबसे पहले प्रधान कलश स्थापित किया गया। इसके बाद बिहार और झारखंड राज्य के कोने-कोने से आए श्रद्धालु एवं स्थानीय भक्तों ने भी मंदिर प्रांगण के बरामदे और सहस्त्र शिवलिंगम मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों में 53 कलश स्थापित की।

कलश स्थापन के बाद इन श्रद्धालुओं ने नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गे की पहले स्वरूप में मां शैलपुत्री की पूजन की। पूजन के बाद इन श्रद्धालुओं ने दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रारंभ किए। दुर्गा सप्तशती के पाठ से पूरा मंदिर प्रांगण भक्तिमय हो गया है। यहां की परंपरा के अनुसार शारदीय नवरात्र के इस साल भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में कलश स्थापन कर दुर्गा सप्तशती का पाठ और पूजन किया जा रहा है।

यहां की मान्यता है कि जो भक्त यहां शारदीय नवरात्र के अवसर पर मंदिर प्रांगण में कलश स्थापन कर दुर्गा सप्तशती का पाठ और पूजन करते हैं, उन्हें मां मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। साथ हीं जो भी भक्त मां से मन्नतें मांगते हैं, उन्हें मां झोलियां भरकर आशीर्वाद देती हैं।

शारदीय नवरात्र को लेकर मंदिर प्रांगण में 7 अक्टूबर से चहल-पहल का माहौल कायम हो गया है। मंदिर में कोई फलाहार तो कोई निराहार रहकर दुर्गा सप्तशती का पाठ और पूजन करने में जुटे हुए हैं। बाहर से आए श्रद्धालु मंदिर प्रांगण स्थित फॉरेस्ट भवन में रह रहे हैं। जिनकी बिजली और पानी की व्यवस्था मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा सुदृढ किया गया है। मंदिर के पुरोहित नागेश्वर बाबा ने बताया कि मंदिर में पहला दिन मां शैलपुत्री की पूजन की गयी। शैलपुत्री देवी दुर्गा के नौ रूपों में पहले स्वरूप में यही नवदुर्गा में प्रथम दुर्गा है।

पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। उन्होंने बताया कि नवरात्र पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करते हैं। और यहीं से उनकी योग साधना का प्रारंभ होता है।

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