मामला दर्ज / जेपी सुपर कोविड अस्पताल के प्रबंधक, डॉक्टर पर केस

Manager of JP Super Covid Hospital, case against doctor
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Manager of JP Super Covid Hospital, case against doctor

  • असहयोग...प्रबंधक मरीजों को भर्ती करने में कर रहे थे आनाकानी, सिविल सर्जन ने की कार्रवाई

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

कोडरमा. कोविड-19 महामारी से गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए प्रशासन द्वारा चिन्हित किए गए झुमरी तिलैया स्थित जेपी अस्पताल के प्रबंधक के अलावा संचालक, वहां कार्यरत चिकित्सकों एवं पारा मेडिकल कर्मियों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। प्राथमिकी दर्ज कराने का कारण वहां के प्रबंधक व चिकित्सक सहित कर्मियों द्वारा मरीजों के इलाज में हाथ पीछे कर लेने सहित प्रशासन को सहयोग नहीं देना बताया गया है।  

सिविल सर्जन पार्वती नाग द्वारा दर्ज कराए गए मामले में कहा गया है कि कोरोना महामारी को लेकर उक्त अस्पताल को 7 अप्रैल को सुपर कोविड अस्पताल के रूप में चिन्हित किया गया था। मगर अस्पताल के प्रबंधक द्वारा 14 अप्रैल को प्रशासन को सूचित किया गया कि कोविड अस्पताल के रूप में वहां मरीजों के इलाज में अस्पताल के चिकित्सक व कर्मी सेवा देने में असमर्थ है। वहां के चिकित्सक डाॅ. आकाश नारायण ने बीमारी का बहाना बताकर सेवा देने में असमर्थता जताई।  

सूचना के बाद उपायुक्त के निर्देश पर 15 अप्रैल को एसडीओ के नेतृत्व में प्रशासन की टीम अस्पताल पहुंचकर उसे अपने कब्जे में ले लिया। प्रशासन की ओर से चिकित्सकों व कर्मियों की व्यवस्था की गई। इस मामले में अस्पताल के प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगा गया। इसके बाद 29 अप्रैल को अस्पताल के कर्मियों द्वारा नोडल पदाधिकारी को सूचित किया गया कि वे लोग सेवा देने के लिए राजी हैं।

पहले माने, बाद में मरीज को भर्ती करने से किया इनकार

29 अप्रैल को प्रशासन की बात मानने के बाद  कोरोना के संदिग्ध मरीज को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराए जाने के दौरान एक बार पुन: वहां के चिकित्सक व कर्मी सेवा देने से इंकार कर बैठे। जिसके कारण मरीज के इलाज में काफी कठिनाई हुई। साथ ही मरीज की मौत भी हो गई। इसी तरह 10 जून को एक बच्चे को अापात स्थिति में इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। मगर अस्पताल के प्रबंधक और कर्मियों द्वारा इलाज में सहयोग नहीं करने को लेकर बाद में उसे रांची रेफर करना पड़ा।

इस बीच 10 जून को वहां के नोडल पदाधिकारी द्वारा प्रशासन को सूचित किया गया कि अस्पताल के स्टाफ व प्रबंधक द्वारा सहयोग नहीं किया जा रहा है, इस कारण से अस्पताल में मरीज का इलाज किया जाना संभव नहीं है। जिसपर एक बार फिर प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगी गई, जिसके जवाब में कहा गया कि उनके पास अस्पताल चलाने में आवश्यक संसाधन नहीं है वहीं उनके कर्मियों को विगत ढ़ाई माह से मानदेय के लिए पैसा नहीं मिला है। 

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