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गुहार:पूर्वी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों ने रैयती हक, पुनर्वास के लिए सांसद से लगाई गुहार

कोडरमा6 महीने पहले
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  • 70 साल बीत जाने के बावजूद इन्हें रैयती हक का पर्चा हासिल नहीं हो सका है
  • फोरलेन रोड निर्माण के दौरान 10 शरणार्थी परिवार बेघर होने की स्थिति में आ गए हैं

रांची-पटना मुख्य मार्ग पर चाराडीह के समीप बसे पूर्वी पाकिस्तान आए शरणार्थी परिवारों ने रैयती हक एवं स्थानीय पुनर्वास के लिए सांसद अन्नपूर्णा देवी के समक्ष ज्ञापन देकर गुहार लगाई है। विदित हो की वर्ष 1951 में तत्कालीन बिहार सरकार के द्वारा मौजा चाराडीह खाता नंबर 10 के कुल 14.69 एकड़ जमीन अधिग्रहण सूचना संख्या 1260/ आर .ई. पी .,दिनांक 2 मार्च 1951 में 2.47 एकड़ जमीन प्लॉट नंबर 13 से 23 तक में मकान कुआं का निर्माण कर एवं खेती के लिए जमीन देकर शरणार्थियों को बसाया गया था। विडम्बना यह है कि लगभग 70 साल बीत जाने के बावजूद इन्हें रैयती हक का पर्चा हासिल नहीं हो सका है। अपने तथा अन्य शरणार्थियों के लिए संघर्ष कर रहे सुजीत कुमार दास कहते हैं कि राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग झारखंड सरकार रांची एवं मुख्यमंत्री जनसंवाद द्वारा आदेश प्राप्त होने के बावजूद भी अभी तक शरणार्थी परिवारों को रैयती हक का पर्चा नहीं दिया गया है। दास ने कहा कि फोरलेन रोड निर्माण में 10 शरणार्थी परिवार बेघर होने के कगार में है।

ज्ञात हो राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग में अक्टूबर 2018 को चाराडीह मौजा में बसाए गए पूर्वी पाकिस्तान के इन परिवारों को रैयती हक का पर्चा देने का आदेश दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। शरणार्थियों का कहना है की 16 जनवरी 2019 को ही मुख्यमंत्री जनसंवाद में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील वर्णवाल और अपर सचिव रामाकांत सिंह ने मामले की समीक्षा करते हुए कोडरमा के चाराडीह में 1951 में बसाए गए दर्जनों विस्थापित परिवारों की शिकायत की सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव ने कोडरमा के नोडल पदाधिकारी को राजस्व निबंधन व भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी गाइडलाइन के आधार पर विस्थापितों और शरणार्थियों को जमीन का पट्टा दिलाने का निर्देश दिया था।

लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई तब जाकर 4 फरवरी 2020 को उपायुक्त कार्यालय के जनता दरबार पर शरणार्थी परिवारों ने आवेदन दिया था, मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर समाहर्ता कोडरमा का पत्रांक 207 दिनांक 6 फरवरी 2020 से पत्र अंचल अधिकारी कोडरमा को भेजा गया है, लेकिन अब तक शरणार्थियों का हक अधर में लटका हुआ है, अब शरणार्थी परिवार न्यायालय के दरवाजे खटखटाने को मजबूर है। निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन कोडरमा के सचिव संदीप मुखर्जी ने प्रशासन व सरकार से इस मामले की जल्द से जल्द निपटारे की मांग की है, ताकि बंगभाषी ये शरणार्थी परिवार बेघर ना हो सके। ज्ञापन में दुर्गादास बनर्जी, सुनील घोष, मनोरंजन दास, बसंती देवी, संजय कुमार, पुर्णिमा दास, सोनाली दास, अंकित दास, वर्षा दास, रितु दास, रेनू दास ,अजय बनर्जी, रंजन सरकार, सपन कुमार डे, संदीप कुमार, सीमा रानी डे,चांद सौदागर डे, चंदन सरकार आदि शरणार्थियों के हस्ताक्षर है।

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