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आरोपी धराए:बच्चा चोर समझकर ग्रामीणों ने जिन दो लोगों को पीटा वे निकले अपहरणकर्ता... पर पकड़े गए सादी वर्दी में पुलिस की बात नहीं मानी, मयूरहंड से वर्दी वाले आए तब जाकर आरोपियों को सौंपा

मयूरहंड14 दिन पहले
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  • बहुत नाटकीय है मयूरहंड जंगल से अपहृत को मुक्त कराने की कहानी... रविवार रात की घटना, 3 लाख फिरौती का इंतजार कर रहे थे अपहर्ता

मयूरहंड के गौरक्षणि जंगल से रविवार की देर शाम पुलिस ने अपहृत हिमांशु मंडल को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से बेहद नाटकीय ढंग से मुक्त कराया था। जामताड़ा जिला निवासी और गिरिडीह के बिरनी में हार्डवेयर की दुकान चलाने वाले हिमांशु मंडल (26वर्ष) को अपहरणकर्ता ने गत शनिवार को उसकी दुकान से उठाया था। फोर व्हीलर से उसे मयूरहंड थाना क्षेत्र के गौरक्षणी जंगल में लाकर रखा गया था। इसके बाद से अपहरणकर्ता फिरौती के लिए मंडल के परिजनों को लगातार फोन कर रहे थे। अपहरणकर्ता मंडल को मुक्त करने के एवज में उसके परिवार वालों से पांच लाख रुपए की मांग कर रहे थे। कई राउंड की बातचीत के बाद उन्हें तीन लाख रुपए देने की बात तय हुई थी। इस बीच मंडल के परिजन गिरिडीह पुलिस को विश्वास में ले लिए थे और बातचीत का सारा ब्यौरा पुलिस को दे रहे थे।

परिजन पुलिस के निर्देश पर ही एक योजना के अनुसार रुपए देने के लिए मयूरहंड के जंगल में पहुंचे थे। योजना थी कि अपहरणकर्ता जैसे ही निर्धारित स्थल पर रुपए लेने पहुंचेंगे, वैसे ही पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेगी। अपहरणकर्ताओं ने मंडल के परिजनों को मयूरहंड के मन्हे प्रतापपुर स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय के पास बुलाया था। तय बातचीत के अनुसार दो अपहरणकर्ता उत्क्रमित मध्य विद्यालय के पास शनिवार की शाम करीब छह बजे पहुंच चुके थे। वे मंडल के परिजनों का इंतजार में इधर-उधर चहल कदमी कर रहे थे। लेकिन इससे पहले पुलिस अपनी योजना के अनुसार मंडल के परिजनों के साथ विद्यालय के पास पहुंचती, उससे पहले ग्रामीण दोनों अपहरणकर्ताओं को संदिग्ध स्थिति में देखकर धर दबोचा। ग्रामीण बच्चा चोर समझकर उनकी पिटाई करने लगे। शाम करीब 7:00 बजे गिरिडीह पुलिस सिविल ड्रेस में मंडल के परिजनों को लेकर वहां पहुंची। वहां का माजरा बदला हुआ था। सिविल ड्रेस में पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों को अपने बारे में बताया कि वे पुलिस के जवान और अधिकारी हैं।

पुलिस के अधिकारियों ने ग्रामीणों को यह भी बताया की उन्होंने जिन दो लोगों को पकड़ रखा है, वे बच्चा चोर नहीं है बल्कि अपहरणकर्ता हैं। इसलिए दोनों को हमारे हवाले कर दे। लेकिन ग्रामीण उन्हें पुलिस मानने से इनकार कर दिए। इसके बाद घटना की सूचना मयूरहंड थाना को दी गई और वहां से पुलिस को बुलाई गई। जब लोकल पुलिस वहां पहुंची तो दोनों अपहर्ताओं को ग्रामीणों ने उन्हें सौंप दिया। इन अपहरणकर्ताओं में गिरिडीह जिला के खोरी महुवा के दीपक कुमार और चतरा जिला मयूरहंड थाना के पथरा गांव के शशि कुमार शामिल थे।

पुलिस दोनों को अपने कब्जे में लेकर उनसे अपहृत के बारे में पूछताछ करने लगी। इसपर अपहरणकर्ताओं ने बताया कि उसका एक साथ संजय पंडा अपहृत मंडल को पास के जंगल में रखा हुआ है। इसके बाद दोनों की निशानदेही पर पुलिस वहां पहुंची और तीसरे अपहरणकर्ता और अपहृत को भी बरामद कर लिया। संजय पंडा मयूरहंड थाना क्षेत्र के बलिया गांव का रहने वाला है। इस तरह पुलिस ने अपहृत को बेहद नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया। ग्रामीणों का शक था कि अपहरणकर्ताओं ने मन्हे गांव के कुआं में कुछ फेंका था। उन्हें शक था की अपहरणकर्ताओं ने कुआं में हथियार फेंका है। बाद में पुलिस ने कुएं से हथियार बरामद करने की कोशिश की। लेकिन कुएं से कुछ नहीं मिला।

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