धर्म-कर्म:श्रीविष्णु मंदिर में लगातार 86वें साल गोवर्धन पूजा का आयोजन, भक्तों ने श्रद्धाभाव से की पूजा-अर्चना

मेदिनीनगर25 दिन पहले
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भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग का प्रसाद लगाती महिलाएं। - Dainik Bhaskar
भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग का प्रसाद लगाती महिलाएं।
  • गोवर्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्णा को लगा छप्पन भोग

गोवर्धन पूजा के मौके पर भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाने की परंपरा रही है। भगवान के इस भोग को अन्नकूट भी कहा जाता है। नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत श्रीविष्णु मंदिर में लगातार 86वें साल गोवर्धन पूजा पर शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्णा को छप्पन भोग लगाया गया।

पुजारी कमल किशोर ने दोपहर 12 बजे भगवान की विशेष आरती की। आरती के उपरांत सभी भक्तों को छप्पन भोग का महाप्रसाद दिया गया।

श्रीविष्णु मंदिर ट्रस्ट के सचिव किशोरी लाठ ने बताया कि साल 1936 में मंदिर की स्थापना के उपरांत से हर साल निर्माता परिवार के घर से छप्पन भोग बनाकर लाने और भगवान को चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।

इस बार भी ट्रस्ट की अध्यक्ष सुचित्रा अग्रवाल ने महिला मंडल के सदस्यों के सहयोग से छप्पन भोग का प्रसाद तैयार किया और उसका भोग भगवान श्रीकृष्ण को लगाया गया।

मौके पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष बबलू गुप्ता, सचिव किशोरी लाल लाठ, सहसचिव श्रवण सोनी, कोषाध्यक्ष अभय कुमार, न्यासी विजय कुमार, लालबाबु, सतीश दुबे, उमेश अग्रवाल, प्रदीप कुमार, समाजसेवी सुरेश अग्रवाल, आलोक कुमार आदि मौजूद थे।
भगवान कृष्ण को अन्नकूट का भोग
शुक्रवार को देशभर में गोवर्धन पूजा यानि की अन्नकूट का त्योहार मनाया जाता है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाए जाने वाले इस त्योहार पर विशेष रूप से गाय, बछड़े, बैल और घर के पालतू पशुओं की पूजा की जाती है।

यह दिन गिरिराज गोवर्धन पर्वत और भगवान कृष्ण को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने मथुरावासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था।

यही वजह है कि इस दिन नई फसल के अनाज और सब्जियों को मिलाकर अन्न कूट का भोग बनाकर भगवान कृष्ण को अर्पित किया जाता है।

बता दें कि गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान कृष्ण के द्वारा इंद्रदेव का अहंकार दूर करने के स्मरण में गोवर्धन का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन अन्नकूट का विशेष महत्व माना जाता है।

दरअसल, यह एक तरह का पकवान होता है, जिसे अन्न और सब्जियों को मिलकर बनाया जाता है और भगवान को भोग लगाया जाता है। गोवर्धन की पूजा करके लोग प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

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