अच्छी पहल:ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देगा उद्यान विभाग, पहली बार पलामू में होगी खेती

मेदिनीनगर2 महीने पहलेलेखक: सच्चिदानंद
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ड्रैगन फ्रूट की खेती की फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
ड्रैगन फ्रूट की खेती की फाइल फोटो।
  • उद्यान विभाग की बैठक में ड्रैगन फ्रूट के साथ केला, पपीता समेत बागवानी की खेती की वार्षिक कार्ययोजना पर सहमति दी गई
  • 1.7 हेक्टेयर में केला, 4 में पपीता, 52 में हाइब्रिड सब्जी, 10 हेक्टे. में मसाला की खेती की जाएगी

सूबे के रैनशेडो के रुप में मशहूर पलामू जिला की पहचान स्ट्राबेरी, पुदीना,थाई अमरुद की खेती से बनने लगी है। इसी कड़ी में अब ड्रैगन फ्रूट की खेती को उद्यान विभाग बढ़ावा देगा। पहली बार उद्यान विभाग ने जिले में 0.16 हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की खेती को कराने का निर्णय लिया है।

बीते दिनों उद्यान विभाग की बैठक में ड्रैगन फ्रूट की खेती के साथ केला, पपीता आदि की खेती का वार्षिक कार्ययोजना पर सहमति दी है। बैठक में जिला उद्यान पदाधिकारी अरुण कुमार व जिला सहकारिता पदाधिकारी अश्विनी कुमार ओझा मौजूद थे। जिला उद्यान पदाधिकारी ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती सफल होने पर अगले साल बड़े पैमाने पर कराई जाएगी।

दो लो काॅस्ट ओनियन स्टोरेज का होगा निर्माण

1.7 हेक्टेयर में केला, 4 में पपीता , 52 में हाइब्रिड सब्जी की खेती, 10 हेक्टेयर में सब्जी मसाला की खेती, 2 हेक्टेयर में प्लास्टिक मल्चिंग, 13 हेक्टेयर जमीन में 30 यूनिट वर्मी कंपोस्ट लगेगा। 0.1 हेक्टेयर जमीन में पानी के स्रोत को बनाने, 5 हेक्टेयर में 5 यूनिट पैक हाउस, 25 मीट्रिक टन क्षमता के 2 लो काॅस्ट ओनियन स्टोरेज स्ट्रक्चर बनाया जाएगा।

दो हजार पोली हाउस और 26 गृह वाटिका की होगी स्थापना
280 बागवान/उद्यान मित्रों/कृषकों को पांच व 11 युवाओं को 25 दिवसीय माली का प्रशिक्षण देगा। विभाग 22.36 हेक्टेयर जमीन में मिर्चा, 13 हक्टे.ओल की खेती कराएगा। 26 गृह वाटिका, जो प्रति इकाई 25 डिसमिल होगी। 350 यूनिट मशरूम किट का वितरण होगा। वहीं, दो हजार पोली हाउस का निर्माण कराया जाएगा, जो प्रति इकाई 1000 मीटर का होगा।

एक एकड़ में डेढ़ से दो लाख का होता है खर्च
डॉ. राजीव बताते हैं एक एकड़ में करीब 400 सीमेंट के पोल पर एक प्लेट रखनी होती है। करीब 1600 प्लांट लगाए जाते हैं। डेढ़ से दो लाख लागत आ जाती है। एक साल में फल लगना शुरू हो जाता है पर दूसरे और तीसरे वर्ष से आमदनी शुरू हो जाती है। एक एकड़ में प्रतिवर्ष 6 से 8 टन तक का उत्पादन लिया जा सकता है। इससे 10 लाख तक का मुनाफा कमा सकता है।​​​​​​​

कैसे करें इसकी खेती

कृषि विज्ञान केंद्र, चियांकी के हेड सह वरीय वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट की खेती महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना आदि राज्यों में होती है। इसके फसल को पानी की बेहद कम आवश्यकता पड़ती है। फसल लगाने से पहले खेत में सीमेंट पोल की जरूरत होती है, जिसमें पोल से पोल की दूरी 6 फीट और कतार से कतार की दूरी 8 से 10 फीट तक होनी चाहिए। पोल के चारों तरफ डेढ़ से दो किलो गोबर की खाद डालकर उसके चारों कोनों में चार पौधे रोपने होते हैं। ड्रैगन फ्रूट के पौधे की रोपाई फरवरी से लेकर अक्टूबर के बीच में कभी भी की जा सकती है। एक बार इसका पौधा लगाने के बाद किसान 15 से 20 वर्ष तक लगातार इससे फल हासिल कर सकते हैं।

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