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कार्यक्रम आयोजित:गीता जयंती सह पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन, गीता तत्व चिंतन पुस्त, जीवन का सार बताया आत्मा शुद्धि की शिक्षा है गीता,असली कुरुक्षेत्र हमारा शरीर

मेदिनीनगरएक महीने पहले
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कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि - Dainik Bhaskar
कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि

गीता प्रचार समिति के तत्वावधान में मारवाड़ी पुस्तकालय में गीता जयंती सह पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया। विजय शंकर मिश्र ने सरस्वती वंदना की। इसके बाद उपस्थित अतिथियों ने श्रीधर प्रसाद द्विवेदी द्वारा सम्पादित पुस्तक गीता तत्व चिंतन और उनके द्वारा रचित खंडकाव्य ब्रजआये ब्रजराज का लोकार्पण किया। मौके पर प्रयागराज से आये मुख्य अतिथि श्रीप्रकाशजी महाराज ने कहा कि अरबों वर्ष पूर्व भगवान ने सूर्य को गीता का उपदेश दिया था। भगवान ने जब कभी भी किसी को भी गीता का उपदेश दिया वह दिन मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी ही रहा है। यही कारण है कि आज के दिन हम गीता जयन्ती मनाते हैं। उन्होंने सतयुग से लेकर कलियुग तक के समय की गणना पर विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो सूर्यकांत चौधरी ने कहा कि गीता का प्रकाशन 180 देशों में हो चुका है। तिलक, गांधी, प्रभुपाद, राधाकृष्णन सहित अनेक विद्वतजनों ने गीता की व्याख्या की है। गीता की परंपरा अति प्राचीन है। कुरुक्षेत्र वैसे तो हरियाणा में एक स्थान है, परंतु वास्तविक कुरुक्षेत्र तो हमारा शरीर है। गीता आत्मा की शुद्धि की शिक्षा है। गीता निष्काम कर्म की शिक्षा देती है।

गीता से हमें सत्य बोलने का मार्गदर्शन मिलता है : श्रीप्रकाशजी

सत्येंद्र तिवारी ने कहा कि अर्जुन ने जब भगवान से युद्धपूर्व संशय व्यक्त किया, तब भगवान ने उनका संशय दूर किया। नागपुर से आये विश्वनाथ पांडेय ने कहा कि व्यक्ति को शास्त्रीय विधि से अपने कार्यों का निष्पादन करना चाहिए। राजेश्वर पांडेय ने कहा कि श्रीधर प्रसाद द्विवेदी ने गीता के तत्त्वों को सरल शब्दों में जन समुदाय के समक्ष प्रस्तुत कर वंदनीय कार्य किया है। गीता का जन्म संशय के निवारणार्थ हुई । हमें गीता से प्रेरित होकर सत्याचरण का संकल्प करना चाहिए। गीता सर्वतोभावेन आज भी प्रासंगिक है।

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