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इबादत:रमजान के शबे कद्र की रात को इबादत में गुजारें

मेदिनीनगरएक महीने पहले
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  • उस रात को कोई भी दुआ मांगी जाए तो वह अल्लाह के रहमों करम से टाली नहीं जाती

कब्रिस्तान कमेटी के अध्यक्ष सह मुहर्रम इंतेजामिया कमेटी, खनवां के खलीफा कमरूद्दीन अंसारी ने कहा है कि रमजान महीना का आखरी अशरा चल रहा है और इस आखरी अशरे 21,23, 25, 27 एवं 29 की शबे कद्र की वो रात जो अल्लाह अपने बंदे की हर दुआ कबूल करता है। हालांकि सभी अफजल रात इबादत मे शुमार किया जाता है लेकिन एक रात ऐसी भी है जो हजार रातों के बराबर है और उस रात को कोई भी दुआ मांगी जाए तो वह अल्लाह के रहमों करम से टाली नहीं जाती।

बस उसे तलाश करने की जरूरत है। रमजान मोमिनो के लिए एक पैगाम लेकर आता है और एक सबक देकर कर चला जाता है। इस्लामी कैलेंडर के नौवें महीने में एक महीना रोजा रखने के साथ साथ सदका के तौर पर फितरा जकात देने का हुकुम भी मजहब ए इस्लाम में कहा गया है। बेबस लोगों का हक है जिनका आप सहारा बने, यह अल्लाह के तरफ से एक तोहफा है कि गरीबों का हक उन्हें फितरा,सदका के तौर पर तक्सीम किया करें। कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार ने 13 मई तक लॉकडाउन बढ़ा दिया है और रमजान अब आखरी पड़ाव पर है।

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