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प्रेमचंद जयंती:प्रेमचंद का साहित्य अत्याचार और उस समय के संघर्ष के नायकों का प्रतिनिधित्व करता है : पंकज

मेदिनीनगर10 दिन पहले
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  • पलामू के बुद्धिजीवियों ने पूंजीवाद के खिलाफ साहित्यकार के संघर्ष को किया याद

प्रेमचंद का साहित्य किसानों, स्त्रियों के दर्द, ब्रिटिश शासकों व जमींदारों के अत्याचार व संघर्ष के नायकों का प्रतिनिधित्व करता है। प्रेमचंद के साहित्य आज भी प्रासंगिक हैं। प्रेमचंद की कहानियां कॉर्पोरेट जगत के विकास की ओर इशारा करती है। आज कॉर्पोरेट जगत और पूंजीवादी शक्तियों के संजाल में पूरा मानव समाज घिर चुका है। इन परिस्थितियों में अगर प्रेमचंद होते तो पूंजीवादी शक्ति के खिलाफ जनता को एकजुट कर रहे होते।

यह बात शुक्रवार की देर शाम इप्टा झारखंड के पेज पर लाइव कार्यक्रम के तहत प्रसिद्ध कथाकार पंकज मित्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुमार वीरेंद्र, जमशेदपुर इप्टा के रंगकर्मी अर्पिता ने कही। 12 जुलाई से 31 जुलाई तक आयोजित प्रेमचंद जयंती पखवाड़ा के समापन कार्यक्रम की शुरुआत इप्टा के वरिष्ठ रंगकर्मी मशहूर संगीत निर्देशक कुलदीप सिंह और उनके साथियों के द्वारा प्रस्तुत गीत हम मेहनतकश जग वालों से की गई।

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