डॉक्टर्स डे पर विशेष / बच्चों और घर-परिवार से दूर रहे, खुद को संकट में डालकर बचा रहे जिंदगी

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  • पलामू के तीन चिकित्सकों की कहानी, जिन्होंने कोरोना से जंग लड़कर जिले के लोगों को बचाया

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

मेदिनीनगर. राणा अरुण सिंह, हम सभी की जिंदगी में डॉक्टर का कितना महत्व है, हम यह अच्छी तरह से जानते हैं। डॉक्टर को इंसान के रूप में भगवान के समान माना जाता है। आज के संदर्भ में यह एक दम सटीक बैठता है, जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी से पीड़ित है ऐसे में डॉक्टर्स अपनी जान की परवाह किए बगैर दूसरों के जीवन की रक्षा कर रहे हैं।

डॉक्टर्स डे के दिन डॉक्टरों को यह मौका मिलता है कि वे अपने अंतर्मन में झांकें, अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझें और चिकित्सा को पैसा कमाने का पेशा न बनाकर मानवीय सेवा का पेशा बनाएं, तभी हमारा यह डॉक्टर्स डे मनाना सही साबित होगा। डॉक्टर्स डे पर हम जिले के कुछ ऐसे ही डॉक्टर की सच्चाई से रूबरू करा रहे हैं, जिसने जान की परवाह किए बिना हम लोगों की सेवा में स्वयं को झोंक दिया। 

कर्तव्य का निर्वाह... विदेश की नाैकरी छाेड़ी मरीजाें काे बचाने के लिए रक्तदान तक किया

प्रवीण सिद्धार्थ युवा डॉक्टर हैं। विदेश की नौकरी छोड़कर सरकारी अस्पताल में सेवा दे रहे हैं। कई बार मरीज को बचाने के लिए अपना खून तक चढ़ाया है। सैनिकों  व उनके परिजनों से कोई फी अपने क्लिनिक में नहीं लेते हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान भी डॉ. सिद्धार्थ ने काफी उल्लेखनीय काम किया है। कोरोना संक्रमण के दौरान क्विक रिस्पांस टीम में शामिल डॉ. सिद्धार्थ बताते हैं करीब 1 माह तक घर के बाहर एक कमरे में रहना पड़ा।

हर समय एक अज्ञात भय के माहौल में रहा। बावजूद इसके अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटा। जब वे शुरू में  पीपीई किट पहन कर जाने लगे तब उनके पिता डॉ. विजय कुमार सिंह की आंखें डबडबा गई। बावजूद इसके उनके डॉ. पिता ने उन्हें पीपीई किट पहनने में मदद की और तैयार कर भेजा। डॉ. सिद्धार्थ बताते हैं कि पलामू के उपायुक्त डॉ. शांतनु कुमार अग्रहरि के नेतृत्व में जिस तरह से लॉकडाउन में काम हुआ उस कारण से पलामू में संक्रमण कम फैला।

ईमानदारी का पालन... काेराेना वायरस की केस स्टडी में खुद काे झाेंक दिया

डॉ राजेश कुमार ऐसे शख्सियत है जो गुमनाम रहकर अपने उत्तरदायित्व को ईमानदारी पूर्वक निभाते रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान क्विक रिस्पांस टीम में शामिल रहने के वजह से 24 आवर ऑन ड्यूटी रहे। 23 मार्च से लेकर अब तक लगातार वे कोरोना पेशेंट का केस स्टडी अध्ययन करते रहे हैं। अब बिल्कुल डर नहीं लगता। वे बताते हैं पलामू के लिए सुखद रहा कि यहां पर कोई कोरोना के लक्षण वाले मरीज नहीं मिले अन्यथा उसके फैलने का दर काफी तेज रहता है। आज तक जो भी मरीज मिले हैं उनके अंदर कोरोना के कोई लक्षण नहीं मिले। उन्होंने आम आवाम से आग्रह किया है कि वह सावधानी बरतें, मास्क लगाएं, भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में ना जाएं। यहां-वहां थूके नहीं। डॉ. अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं। आम नागरिक भी अपने कर्तव्य का पालन करें, आज देश के लिए यही सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है।

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