जिम्मेंदारों की अनदेखी:वनभूमि के हस्तांतरण की फंसी पेंच, 21 वर्ष बाद भी नहीं पूरी हुई अमानत बैराज परियोजना

मेदिनीनगर20 दिन पहलेलेखक: संजय तिवारी
  • कॉपी लिंक
अधूरा पड़ा अमानत बैराज परियोजना। - Dainik Bhaskar
अधूरा पड़ा अमानत बैराज परियोजना।
  • पांकी प्रखंड में अमानत नदी पर 2012 में ही बनकर तैयार बैराज ,वनभूमि का हस्तांतरण लंबित होने से मुख्य नहर का 60 व वितरण का 80 फीसदी काम शेष

पलामू जिले के करीब 58 हजार एकड़ जमीन में सिंचाई की सुविधा सुलभ कराने के लिए पांकी प्रखंड में अमानत नदी पर बनाया गया बैराज 2012 में ही बनकर तैयार है। वनभूमि का हस्तांतरण कार्य लंबित होने के कारण मुख्य नहर का 60 फीसदी व वितरण का करीब 80 फीसदी काम शेष है।

अमानत नदी के दाहिने तरफ पांकी, तरहसी, मनातू और पाटन के बड़े हिस्से को इस बराज से लाभ मिलने वाला था परंतु बराज बन जाने के आठ साल बाद भी स्थिति यथावत है। 2015 में विधायक राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा में 12 मार्च को सरकार से अमानत बराज योजना से संबंधित सवाल पूछा था। सरकार ने बताया था कि योजना पूर्ण है परंतु बायें अपस्ट्रीम में गाइड बांध का कार्य 185 मीटर किया जाना है जो जन विरोध के कारण नहीं हो पा रहा है।

नहर निर्माण के लिए करीब 320 एकड़ वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता है। वन भूमि के हस्तांतरण के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। अमानत बराज योजना 1983 में शुरू हुई थी। इसका प्राक्कलन बढ़कर 341.11 करोड़ हो गया है। मार्च 2018 तक 279.15 करोड़ रुपए खर्च हो चुके थे। 2018-19 में इस योजना के लिए 37.62 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था जिसमें से 37.23 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।

पेयजल व सिंचाई के लिए हर वर्ष मचता है हाहाकार
अल्पवर्षा और बरसात के दिनों में पानी के स्टोरेज का पुख्ता प्रबंध नहीं होने के कारण पलामू जिले में सिंचाई और पेयजल के लिए हर वर्ष हाहाकार मच जाता है। फसलें सूख जाती हैं और पेयजल के लिए लोग भटकते नजर आते हैं। जिले में कई सिंचाई परियोजनाएं शुरू तो हुईं पर कई वर्ष बीत जाने के बाद भी वे पूरी नहीं हो पाई हैं। लंबे समय से निर्माण अधूरा रहने के कारण इसकी मशीनरी पडे़-पड़े जंग खा रही है। कई पार्ट्स तो अनुपयोगी होने के कगार पर पहुंच गए हैं।

वन विभाग की 21 शर्तें, 19 हो गई हैं पूरी : मुकेश, पलामू में 58 हजार एकड़ पर सिंचाई की योजना

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता मुकेश कुमार ने कहा कि विभाग को 21 शर्तों के साथ वन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलना है। विभाग ने 19 शर्तें पूरी कर ली है। इसके तहत 10 गांव में पिलरिंग करना था,जिसमें से आठ गांव में पिलरिंग का काम पूरा कर लिया गया। शेष दो गांव में अड़चन आ रही है। जिला प्रशासन से सहयोग मांगा गया है। 21 वीं शर्त भी इसी से जुड़ी है। जिसके बाद वन विभाग से एनओसी मिल जाएगी। मेरा प्रयास है कि बराज के ऊपरी हिस्से में 180 मीटर का बांध बनाया जाए।भू अर्जन का काम किया जा रहा है। विभाग द्वारा राशि भी जमा कर दी गई है। विभाग पानी इकट्ठा कर जहां तक नहर का निर्माण हुआ है,पानी छोड़ने का काम करेगा। इसके बाद शेष काम किया जाएगा।

अमानत नदी पर है यह परियोजना : अमानत नदी पर स्थित यह परियोजना के भीतरी हिस्सों में नहीं के बराबर कार्य हुए हैं। बराज में फाटक तो लग चुका है, लेकिन इसके डूब क्षेत्र में पड़नेवाले लोगों को आज तक पूरा मुआवजा नहीं मिल पाया है।

2001 में मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने रखी थी आधारशिला

अमानत बरात पांकी-प्रखंड मुख्यालय से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसकी आधारशिला झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य के तत्कालीन जल संसाधन मंत्री रामचंद्र केशरी, भूमि सुधार, राजस्व, एवं निबंधन मंत्री मधु सिंह की उपस्थिति में वर्ष 2001 में रखी थी। इसको लेकर किसानों एवं पांकी वासियों को उम्मीद जगी थी कि बराज के बन जाने से पांकी सहित आसपास के क्षेत्रों का जलस्तर बढ़ेगा।

खबरें और भी हैं...