उग्रवादी संगठन:मुठभेड़ में मारा गया उग्रवादी पलामू के लेस्लीगंज का था, मां बोली कर्मा में घर से कमाने निकला था, पता नहीं था कि उग्रवादी बन गया

मेदिनीनगर2 महीने पहले
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मुठभेड़ में माने गए उग्रवादी के शव को जंगल से लेकर आते जवान। - Dainik Bhaskar
मुठभेड़ में माने गए उग्रवादी के शव को जंगल से लेकर आते जवान।
  • 24 घंटे भूखे रह जवानों ने जंगल से निकाला उग्रवादी का शव, एके​​​​​​​-47 समेत 7 हथियार भी मिले

सदर थाना क्षेत्र के सलैया व नावाडीह गांव के बीच स्थित जंगल में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन झारखंड जनमुक्ति परिषद (जेजेएमपी) व झारखंड जगुआर पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में पुलिस के जवानों ने एक उग्रवादी को मार गिराया है। इसकी पहचान हो गई है। मारा गया उग्रवादी कुंदन कुमार पलामू जिले के लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के हसनदाग का रहने वाला है। इसकी पुष्टि कुंदन कुमार की मां व सतबरवा खामडीह से आए उसके मामा-मामी ने की। कुंदन दुबियाखांड़ व चियांकी के बीच स्थित पलामू ढाबा में काम करता था, वहीं वह नक्सलियों के संपर्क में आया था।

 हालांकि इसकी पुष्टि पुलिस अधिकारियों द्वारा अभी तक नहीं की गई है। मुठभेड़ के बाद उग्रवादियों का एके-47 समेत सात हथियार भी बरामद किया गया है। इसकी भी पुष्टि आधिकारिक तौर पर नहीं हुई है। मुठभेड़ के बाद से ही झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ 214 वीं बटालियन व जिला पुलिस के जवान रात भर सर्च अभियान में लगे रहे। बुधवार को पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन, 214 बटालियन के कमांडेंट ऋषि राय सहाय, अभियान एसपी विपुल शुक्ला, मुख्यालय डीएसपी संतोष कुमार मिश्र, पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी अमित कुमार गुप्ता दल बल के साथ घटनास्थल में पहुंचे और नक्सली के शव को लाने तक डटे रहे।

घटना के 21 घंटे बाद रांची से पहुंची फॉरेंसिक जांच टीम
मुठभेड़ की घटना के 21 घंटे बाद रांची से फॉरेंसिक जांच टीम बुधवार की दोपहर 1:30 बजे घटनास्थल पहुंची। उसके बाद बतौर दंडाधिकारी नियुक्त अंचलाधिकारी रूद्र प्रताप की निगरानी में शव को उठाया गया। लातेहार सदर अस्पताल में डॉक्टरों की तीन सदस्यी टीम द्वारा उग्रवादी के शव का पोस्टमार्टम किया गया। इस मौके पर एसडीओ शेखर कुमार, डाक्टर, उग्रवादी कुंदन की मां,मामा मामी मौजूद थे।

इधर, उग्रवादी कुंदन की मां ने बताया कि मेरा बेटा करमा पर्व के दिन घर से निकला था। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला। हम लोग सोचे कि वह कमाने गया है। हमें नहीं पता था कि वह उग्रवादी संगठन में काम करता है। इधर, पत्रकारों को घटनास्थल पर जाने से पुलिस ने रोक दिया।

पुलिस के साथ घूमने वाले अब बने दुश्मन

झारखंड जगुआर व जेजेएमपी के सुप्रीमो पप्पू लोहरा के साथ हुई मुठभेड़ के बाद चर्चा का बाजार गर्म है। जेजेएमपी के सुप्रीमो पप्पू लोहरा व पुलिस के बीच ऐसी क्या दुश्मनी हो गई कि मुठभेड़ की नौबत आ गई। तीन साल पहले सीआरपीएफ व जेजेएमपी उग्रवादियों की जंगल की एक फोटो वायरल हुई थी।

इसमें सीआरपीएफ के अधिकारी व जवान के साथ जेजेएमपी के सुप्रीमो पप्पू लोहरा व सुशील उरांव दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद बताया जाता था कि जेजेएमपी को पुलिस संरक्षण देती है। आखिर ऐसी क्या बात हो गई कि आज वही जेजेएमपी पुलिस की दुश्मन हो गई। वहीं सुप्रीमो पप्पू लोहरा का नाम बकोरिया कांड में भी सामने आया था।

कई जिलों में तेजी से पैर पसार रहा है जेजेएमपी

बताया जाता है कि माओवादी व टीएसपीसी को कमजोर करने के उद्देश्य से जेजेएमपी को पुलिस संरक्षण देती थी। जिस क्षेत्र में मुठभेड़ हुई है, वह पूरा इलाका जेजेएमपी का है। उस क्षेत्र से माओवादी व टीएसपीसी दूर-दूर तक दिखाई नहीं देते हैं। साथ ही लातेहार, पलामू, गढ़वा, लोहरदगा आदि क्षेत्रों में तेजी से पैर पसार रहा है। एके-47, एके-56 जैसे हथियार भी उनके पास हैं।

सलैया और नावाडीह के बीच का जंगल जेजेएमपी उग्रवादी संगठन का गढ़ है

सदर थाना क्षेत्र के सलैया व नावाडीह के बीच स्थित जंगल जेजेएमपी उग्रवादी संगठन का गढ़ माना जाता है। यह जंगल तीनों ओर पहाड़ से गिरा हुआ है। एक तरफ से रास्ता है। पहाड़ के ऊपर से ही उग्रवादियों को पुलिस गतिविधि की जानकारी दूर से ही मिल जाती है। इसके साथ ही उग्रवादी सतर्क हो जाते हैं। मुठभेड़ स्थल के आसपास गांव नावाडीह, नारायणपुर, बरेनी, सलैया, गुलरियाटांड़ आदि गांव में जेजेएमपी उग्रवादियों का बराबर आना जाना लगा रहता है। इस कारण ग्रामीण भी जेजेएमपी उग्रवादी संगठन के खिलाफ बोलने से डरते हैं।

वहीं, प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन जेजेएमपी व झारखंड जगुआर टीम के साथ हुई मुठभेड़ के बाद बुधवार को एसडीपीओ संतोष कुमार मिश्र व थाना प्रभारी अमित कुमार गुप्ता ने गुलरियाटांड़ गांव से एक ग्रामीण सुरेंद्र भुइयां (28 वर्ष) को हिरासत में लिया है। सुरेंद्र भुइयां की मां बिमला मसोमात ने बताया कि मेरा बेटा केरल में कार्य करता है। एक दिन पहले मंगलवार को ही घर आया था। पुलिस आई और मेरे बेटे को पकड़ कर ले गई। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस बेगुनाह लोगों को परेशान कर रही है।

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