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केस दर्ज करने का निर्देश:शादी करने को कहा तो प्रेमिका और उसके बच्चे को जान से मारने की कोशिश

मेदिनीनगरएक महीने पहले
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अपने परिजनों के साथ गोद में बच्चे को ली हुई पीड़िता। - Dainik Bhaskar
अपने परिजनों के साथ गोद में बच्चे को ली हुई पीड़िता।
  • आरोपी पहले भी जेल जा चुका

न्याय के लिए संघर्ष कर रही एक बिन ब्याही मां और उसके डेढ़ साल के बच्चे को जान से मारने का प्रयास किया गया। मामला पलामू के पांडु थाना क्षेत्र का है। बच्चे का पिता मिथिलेश कुमार पांडु के रबरा गांव का रहने वाला है। 23 वर्षीय युवती ने मिथिलेश पर आरोप लगाया है कि केस को खत्म करने के लिए दो साल से लगातार धमकी दीया जा रही है। इसके अलावे मिथिलेश बच्चा और उसे मारने की फिराक में भी है। मिथिलेश सरकारी सेवा में वन विभाग में नावाजयपुर में कार्यरत है।

गुरुवार को युवती के गांव कुटमु के ही रहने वाले भक्तु पाल, अमृत पाल व भक्तु की पत्नी ललिता देवी उनके घर में घुस आए और दुधमुंहे बच्चे को पटक दिया। युवती और उसके 12 वर्षीय भाई को मारकर जख्मी कर दिया। उन्हें धमकी दी कि गया कि केस नहीं उठाने पर जान से मार दिया जाएगा।

युवती का कहना है कि घटना के बाद जब कार्रवाई के लिए पांडु थाना गई तो दुर्व्यवहार कर भगा दिया गया। इलाज के लिए मेदिनीनगर राय मेडिकल कॉलेज पहुंचीं युवती व उसके परिवार को एटक के झारखण्ड स्टेट सचिव राजीव कुमार ने उन्हें अपने घर में शरण दिया। विश्रामपुर एसडीपीओ को दोषियों पर कार्रवाई के लिए आवेदन दिया गया।.

जानें क्या है पूरा मामला :

पीड़िता ने साल 2017 में रेहला स्थित लक्ष्मी चंद्रवंशी कॉलेज में बीएससी में एडमिशन लिया था। कोचिंग करने के लिए वह मेदिनीनगर में जीएलए कॉलेज के पास अपने एक दोस्त के साथ रह रही थी। दोस्त का चचेरा भाई मिथिलेश वहां आता रहता था। इसी दौरान दोनों में प्यार हुआ और शारीरिक सम्बन्ध स्थापित हो गया। युवती जब गर्भवती हो गई तो मिथिलेश पर शादी के लिए दबाव बनाने लगी।

वह शादी के लिए तैयार नहीं हुआ तो अप्रैल 2019 में युवती ने इस संबंध में महिला थाना में मामला दर्ज कराया। जिसके बाद युवक को जेल जाना पड़ा। इस दौरान मिथिलेश के पिता भुनेश्वर प्रजापति ने युवती को बताया कि उनका बेटा शादी के लिए तैयार है। इस आधार पर समझौता हुआ और मिथिलेश जमानत पर जेल से बाहर आ गया। छह माह जेल में रहकर बाहर आते ही वह शादी से मुकर गया। इसी बीच वर्ष 2019 के अक्टूबर माह में युवती ने एक बच्चे को जन्म दिया।

विश्रामपुर एसडीपीओ को दिया गया आवेदन
एसडीपीओ सुरजीत कुमार ने बताया कि आवेदन मिलते ही थानेदार को एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। थाना से भगाने की बात को उन्होंने खारिज किया। कहा कि थाना में पीड़िता से लिखित देने के लिए कहा गया था। उन्होंने वहां आवेदन नहीं दिया।

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