भीम चूल्हा पर चढ़ेगी 4 टन की कड़ाही:भिलाई में बन रही 4 टन की कड़ाही, भीम चूल्हा पर चढ़ेगी

मोहम्मदगंज20 दिन पहलेलेखक: शंभू चौरसिया
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तीन शिलाखंडों से बना ऐतिहासिक भीमचूल्हा। - Dainik Bhaskar
तीन शिलाखंडों से बना ऐतिहासिक भीमचूल्हा।
  • दशहरा बाद इस पर्यटन स्थल में दिखेगा एक और अद्भुत नजारा, पार्क समेत हो रहा विकास

मोहम्मदगंज व इसके आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन की दृष्टिकोण से कई महत्वपूर्ण प्राकृतिक व कृत्रिम सौंदर्य स्थल हैं। ये सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। किंवदंतियों के अनुसार महाभारत कालीन भीम चूल्हा वहां बना पार्क, इसके पहले शिवमंदिर व बाद में माता कुंती के अलावा पांच पांडव भाईयों की स्थापित आदमकद प्रतिमाएं आस्था व आकर्षण के केंद्र बन गए हैं। संवेदक पवन कुमार सिंह के अनुसार भीम चूल्हा पर भिलाई कारखाने में एफआरसी मेटल का 10 मीटर डाया का 4070 किग्रा वजनी बनाया जा रही कड़ाही चढ़ाई जाएगी।

भीमचूल्हा के कारण ही भीम बैराज का नामाकरण हुआ

बताया जाता है कि इसी स्थल के पास बने बैराज का भीम चूल्हा के कारण ही नामकरण किया गया है। इसमें जमा अथाह जल सुंदर नजारा पेश करता है। बैराज में पानी के बीच इस पर्यटन स्थल के शिव मंदिर व पार्क का प्रतिबिंब अलग दृश्य उपस्थित करता है। इनके अलावा मोहम्मदगंज-महुडंड पथ पर सीता चुआं नामक स्थान सालभर निरंतर बहता पानी राहगीरों की प्यास बुझाने व वहीं वटवृक्ष तले विश्राम के लिए पड़ाव के तौर पर विकास व सौदर्यीकरण की बाट जोह रहा है। इससे पहले इसी मार्ग में लकड़ही पहाड़ पर दो छोटे पत्थरों पर सदियों से टिका विशालकाय पत्थर प्रकृति प्रदत्त अनुपम उपहार के रूप में जाना जाने लगा है।

लोगों ने कहा-किसी ने गोल पत्थर लाकर स्थापित किया

रामजन्म राम का कहना है कि वर्षों पहले किसी बुजुर्ग ने दूसरे गोल पत्थर को ले जाकर स्थापित किया था। इस प्रकार देखा जाए, तो आसपास का पूरा इलाका कई प्रकृति प्रदत्त उपहारों से भरा हुआ है। इसी के साथ मोहम्मदगंज में निर्मित व भजनियां गांव में निर्माणाधीन भव्य देवी मंदिर के अलावा रेलवे परिसर का काली मंदिर भी आस्था स्थल के रूप में श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण के मुख्य केंद्र बन गए हैं। इन सभी कारणों से यह कहा जाए कि पूरा इलाका आकर्षक व आस्था के केंद्र के कारण पर्यटन व भ्रमण के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

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