ऐतिहासिक भीमचूल्हा पर चढ़ी 150 किलो की कड़ाही:मोहम्मदगंज में तीन शिलाखंडों के चूल्हा नुमा पत्थरों पर रखी गई कड़ाही, सैलानियों के लिए आकर्षण का बना केंद्र

मोहम्मदगंज13 दिन पहलेलेखक: शंभू चौरसिया
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भीमचूल्हा पर चढ़ी कड़ाही - Dainik Bhaskar
भीमचूल्हा पर चढ़ी कड़ाही

ऐतिहासिक भीमचूल्हा अब पहचान और ख्याति को लेकर किसी भी अन्य पर्यटक स्थलों से कमतर नहीं रह गया है। रोजाना पर्यटन की दृष्टिकोण से पार्क व वाच टावर के निर्माण के साथ इसके सौंदर्यीकरण व विकास की दिशा में काम होते रहे हैं। अब तीन शिलाखंडों के चूल्हा नुमा पत्थरों पर करीब 150 किग्रा की कड़ाही चढ़ाई गई है।

दरअसल, यही वे पत्थर हैं, जिनके चुल्हाकार दिखने के कारण भीमचूल्हा के नाम से ख्याति मिली है। अब कड़ाही चढ़ाए जाने से भीमचूल्हा की पहचान मिल गई है। कहा जाता है कि इन तीन शिलाखंडों को पांडव पुत्र बलशाली भीम ने ही एकत्रित किया होगा। यही वजह है कि इस स्थल को भीमचूल्हा के नाम से जाना जाने लगा।

बताते चलें कि किंवदंतियों के आधार पर रचित इतिहास में इस स्थल को महाभारत काल से जुड़ा बताया गया है। जहां पांडव पुत्रों ने अज्ञातवास के दरम्यान कुछ समय व्यतीत किया था। तभी भीम ने इस चूल्हे को तीन शिलाखंडों को इकट्ठा कर बनाया होगा।

भिलाई में बनवाई गई है कड़ाही, इसे रखने से बढ़ी महत्ता : ठेकेदार

इस स्थल के सौंदर्यीकरण व विकास के काम के लिए नामित ठेकेदार पवन कुमार सिंह ने बताया कि इस चूल्हे को एफआरपी मटेरियल से भिलाई में निर्मित कराया गया है। इसके अलग-अलग हिस्सों को इस स्थल पर मेदिनीनगर के कारीगरों ने कड़ाही के आकार में प्रतिष्ठापित किया है।

पुजारी सह सुरक्षा प्रहरी गंगा तिवारी ने बताया कि इससे प्रतिष्ठापित होने के साथ ही इसे देखने और इसकी फोटोग्राफी को लेकर सैलानियों का कौतूहल बढ़ गया है। हालांकि अभी कोरोना की तीसरी लहर में ओमिक्राॅन वैरिएंट के संक्रमण से लोगों के बचाव के लिए पार्क में भ्रमण को प्रतिबंधित कर दिया गया है। बावजूद इसके पास से ही गुजरे मुख्य पथ पर गुजरने वाले लोग बाहर से ही इसे एक पल निहारे बिना गंतव्य की दिशा में नहीं बढ़ते हैं।

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