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पोस्ट कोविड:फेफड़े-कोरोनरी आर्टरी में खून का थक्का जमने से 20 दिन में 15 की मौत, कोविड निगेटिव आने के बाद रोज रिम्स आ रहे करीब 45 मरीज

रांचीएक महीने पहलेलेखक: अमन मिश्रा
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रिम्स के मेडिसिन वार्ड में इलाज के लिए भर्ती पोस्ट कोविड मरीज। - Dainik Bhaskar
रिम्स के मेडिसिन वार्ड में इलाज के लिए भर्ती पोस्ट कोविड मरीज।

कोरोना की दूसरी लहर भले धीरे-धीरे थम रही है, लेकिन इस लहर ने इतनी तबाही मचाई कि ठीक होने के बाद भी लोग खामियाजा भर रहे हैं। रिम्स की पोस्ट कोविड ओपीडी में हर दिन 40 से 45 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 20% मरीजों की स्थिति गंभीर देखी जा रही है। रिम्स में वैसे मरीजों को भी निजी अस्पताल से रेफर किया जा रहा है, जिनकी प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के दौरान स्थिति बिगड़ी है।

रिम्स के क्रिटिकल केयर हेड डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य के अनुसार, रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में पोस्ट कोविड के करीब 50 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। इनमें 70% से ज्यादा मरीज गंभीर स्थिति में हैं। कोविड ने शरीर को इतनी बुरी तरह प्रभावित किया है कि भर्ती में से 50% से अधिक मरीजों के फेफड़े और हृदय में खून का थक्का जम गया है। यह मौत की सबसे बड़ी वजह देखी जा रही है। यहां पिछले 20 दिनों में 15 से ज्यादा मौतें इलाज के दौरान हो चुकी है।
ज्यादातर निजी अस्पतालों से गंभीर मरीज रिम्स आते हैं

खून पतला करने की दवा से कुछ राहत

डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया कि 50% मौत का कारण थ्रोंबोसिस है। इसके कारण लोगों के फेफड़े और हृदय के अंदर खून का थक्का जम जा रहा है। इस वजह से लोगों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि कोविड संक्रमण के दौरान ही देखा जा रहा था कि लोगों के शरीर में खून गाढ़ा हो रहा है। इसे पतला करने की दवाई लगातार मरीजों को दी जा रही है। कुछ मरीजों की कॉम्प्लिकेशन दवा के कारण दूर हो रही है।

कॉम्प्लिकेशन... जो ले रही जान
रेस्पिरेट्री क्रीपल... सांस को चलाने वाला पूरा सिस्टम फेल हो जाना। सिर्फ फेफड़ा ही नहीं, इंटरकंट्राेल, मसल आदि जो सांस का संचार करने वाला पूरा सिस्टम डैमेज हो जाता है। इस वजह से सांस अलग अलग हिस्सों में नहीं फैल पाता।

  • हृदय गति अत्यधिक तेज हो जाना।
  • शरीर में खून मोटा होने के कारण अलग-अलग हिस्सों में थक्का जम जाना।
  • मरीज को सांस लेने में कठिनाई होना।
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