राज्य में 2 नए इंजीनियरिंग काॅलेज खुलेंगे:3 साल से गाेला व काेडरमा में तैयार है बिल्डिंग, काॅलेज संचालन के लिए ओडिशा और बेंगलुरू की संस्था का चयन

रांची2 महीने पहलेलेखक: संताेष चाैधरी
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3 साल से गाेला व काेडरमा में तैयार है बिल्डिंग। - Dainik Bhaskar
3 साल से गाेला व काेडरमा में तैयार है बिल्डिंग।

झारखंड में अगले साल दो नए इंजीनियरिंग काॅलेज खुलने का रास्ता साफ हाे गया है। काेडरमा और गाेला में तीन साल पहले 202 कराेड़ की लागत से तैयार बिल्डिंग में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) पर दाेनाें काॅलेजाें का संचालन हाेगा।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से इसके संचालन के लिए प्राइवेट शिक्षण संस्थानाें से प्रस्ताव मांगा गया था। इसके बाद करीब पांच संस्थानों ने प्रस्ताव दिया था। इनमें ओडिशा के सीबी रमन इंजीनियरिंग कॉलेज को कोडरमा और बेंगलुरू के जैन यूनिवर्सिटी को गोला में कॉलेज चलाने के लिए चयनित किया गया है। क्योंकि, कॉलेज चलाने के लिए सरकार द्वारा तय किए गए मापदंड पर ये दोनों यूनिवर्सिटी ही सफल रहे।

अब विभाग ने दोनों कॉलेज को इंजीनियरिंग काॅलेज बिल्डिंग में चलाने की अनुमति देने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है। विभाग में सचिव और निदेशक की नियुक्ति होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इन दाेनाें काॅलेजाें के शुरू हाेने से राज्य से इंजीनियरिंग करने के इच्छुक विद्यार्थियाें काे उच्च गुणवत्ता की शिक्षा मिलेगी।

काॅलेज संचालन के लिए ओडिशा व बेंगलुरू की संस्था का चयन

  • 6937 सीटें हैं राज्य में अभी इंजीनियरिंग की
  • 300 सीटों की बढ़ाेतरी हाे जाएगी दोनों कॉलेज खुलने से
  • 200 सीटें एमबीए में भी बढ़ जाएंगी

इंजीनियरिंग के साथ मैनेजमेंट की भी पढ़ाई हाेगी

काेडरमा और गाेला में खुलने वाले काॅलेजाें में इंजीनियरिंग के साथ ही मैनेजमेंट और अन्य काेर्स की भी पढ़ाई हाेगी। ताकि एक ही कैंपस में स्टूडेंट्स काे कई राेजगारपरक काेर्स की पढ़ाई कराई जा सके। सूत्राें के मुताबिक दाेनाें काॅलेज प्रबंधन ने सरकार के सामने काॅलेज काे यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की शर्त भी रखी है। सरकार भी यूनिवर्सिटी का दर्जा देने पर विचार कर रही है। हालांकि अब तक इस पर काेई अंतिम फैसला नहीं हाे पाया है।

चार इंजीनियरिंग काॅलेजाें की बिल्डिंग तैयार, शुरू एक भी नहीं

राज्य सरकार ने तीन साल पहले 328 करोड़ रुपए की लागत से चार इंजीनियरिंग कॉलेजाें की बिल्डिंग का निर्माण कराया था। लेकिन एक का भी संचालन नहीं हो पाया। जमशेदपुर में 26 करोड़ रुपए की लागत से एक बिल्डिंग का निर्माण हुआ था। यहां इंजीनियरिंग कॉलेज की जगह रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय चलाने का निर्णय लिया गया है।

कोडरमा में 102 करोड़ और गोला में 100 करोड़ की लागत से महिला इंजीनियरिंग कॉलेज व पलामू में 100 करोड़ की लागत से कॉलेज बिल्डिंग का निर्माण कराया गया था। बाद में गोला में बने बिल्डिंग को महिला इंजीनियरिंग कॉलेज की जगह को-एड कॉलेज में तब्दील करने का फैसला लिया गया।

हर साल करीब 15 हजार छात्राें काे जाना पड़ता है बाहर

राज्य में अभी निजी और सरकारी इंजीनियरिंग काॅलेजाें में कुल 6937 सीटें हैं। यहां के करीब 30 हजार स्टूडेंट्स हर साल जेईई मेंस की परीक्षा देते हैं। इनमें करीब 450 स्टूडेंट्स आईआईटी के लिए सफल हाेते हैं। वहीं बीआईटी मेसरा, बीआईटी सिंदरी व एनआईटी जमशेदपुर में स्टेट काेटा 50% ही है।

ऐसे में बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स काे दूसरे राज्याें में जाना पड़ता है। एक अनुमान के मुताबिक करीब 15 हजार छात्र पढ़ाई के लिए दूसरे राज्याें में चले जाते हैं। यानी राज्य का करीब 375 कराेड़ सालाना बाहर चला जाता है।

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