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चेतावनी:24 घंटे की मोहलत, कल नक्शा नहीं दिखाया तो एकतरफा आदेश

रांची4 दिन पहले
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झारखंड हाईकोर्ट - Dainik Bhaskar
झारखंड हाईकोर्ट
  • हिनू नदी, कांके डैम व बड़ा तालाब के अतिक्रमणकारियों को नोटिस

झारखंड हाईकोर्ट की फटकार के बाद रांची नगर निगम भी अवैध भवन बनानेवालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में जुट गया है। मंगलवार को नगर आयुक्त मुकेश कुमार के कोर्ट में अवैध निर्माण से संबंधित 207 मामलों की सुनवाई हुई। कोर्ट ने सभी मामलों में भवन मालिकों को मात्र 24 घंटे की मोहलत दी है। 22 जुलाई को चिह्नित भवन मालिक अपने भवन का स्वीकृत नक्शा व कागजात नगर आयुक्त कोर्ट में जमा नहीं करते हैं, तो कोर्ट एकतरफा आदेश पारित कर सकता है।

जिन भवन मालिकों को नक्शा जमा करने का आदेश दिया गया है, उनमें सबसे अधिक 87 भवन कांके डैम के किनारे, 78 भवन हिनू नदी के किनारे और 42 भवन बड़ा तालाब के किनारे बनाए गए हैं। हिनू नदी के किनारे होटल एमराल्ड, बड़ा तालाब के किनारे सेवा सदन, चिन्मय मिशन आश्रम, माहेश्वरी भवन और कांके डैम के आसपास के दर्जनों बड़े भवनों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

अपर बाजार में भी 50 भवन चिह्नित किए गए हैं, जिन पर अवैध निर्माण का केस पहले से चल रहा है। भवन मालिकों ने अब तक नक्शा व कागजात जमा नहीं किया है, इसलिए चिह्नित भवनों को भी तोड़ने की तैयारी है। हालांकि निगम ने अपर बाजार में चिह्नित भवन मालिकों को अंतिम नोटिस नहीं भेजा है।

नगर आयुक्त कोर्ट से 207 भवन मालिकों को अंतिम नोटिस

अवैध निर्माण-अतिक्रमण के लिए अफसर ही जिम्मेवार, हाईकोर्ट की फटकार के बाद जागे

रांची | रांची शहर और आसपास के क्षेत्रों में नदी, डैम और तालाब के कैचमेंट एरिया और उसके आसपास के क्षेत्रों में धड़ल्ले से अतिक्रमण और अवैध निर्माण हो गए हैं। ये निर्माण एक दिन में नहीं हुए। जमीन घेरी गई, फिर कच्चा निर्माण हुआ और देखते ही देखते एस्बेस्टस के मकानाें के साथ-साथ बिल्डिंगें खड़ी हो गईं। जिन भवनों को अवैध बताते हुए नगर निगम अंतिम नोटिस जारी कर रहा है, वे भी एक दिन में नहीं बने। कई वर्षों में भवन का निर्माण हुआ है।

लेकिन उस समय निगम के अफसरों ने न तो अतिक्रमण रोका और न ही अवैध निर्माण पर रोक लगाई। निगम से लेकर आरआरडीए के अफसर, टाउन प्लानर और इंजीनियर सिर्फ और सिर्फ नक्शा पास करने के खेल में शामिल रहे। इस दौरान अवैध निर्माण की जहां भी शिकायतें आईं वहां निगम के पदाधिकारियों ने जांच तो जरूर कराई,लेकिन या तो मामला लेनदेन कर रफा-दफा कर दिया गया या कमजोर वर्ग लेन-देन नहीं कर सका, तो उस पर अवैध निर्माण का केस दर्ज कर छोड़ दिया, कार्रवाई नहीं की गई। अब हाईकोर्ट की फटकार के बाद निगम व प्रशासन अतिक्रमण हटा रहा और अवैध निर्माण तोड़ रहा।

नक्शा के खेल में ही मगन रहे अफसर और इंजीनियर

शहर के नदी, डैम और तालाब के कैचमेंट एरिया का अतिक्रमण और शहर में अवैध निर्माण होता रहा, लेकिन नगर निगम और आरआरडीए के अफसर लेनदेन कर आंखें बंद किए रहे। इन अफसरों और इंजीनियरों ने सिर्फ चैंबर में बैठकर नक्शा पास करना ही अपना मुख्य काम मान लिया। नतीजा यह हुआ कि नदी, तालाब, डैम सहित सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से कब्जा हाेता चला गया और अवैध निर्माण भी बढ़ते चले गए।

शहर में 1 लाख से ज्यादा घर बिना नक्शे के बने हैं

नगर विकास विभाग के बिल्डिंग बायलॉज के सख्त नियम और नक्शा पास कराने में होनेवाले झंझट की वजह से पूरे शहर में एक लाख से अधिक घर बिना नक्शा के बने हैं। रांची में जमीन विवाद और नक्शा पास कराने के दौरान होनेवाली अनुचित मांग की वजह से अधिकतर लोग बिना नक्शा पास कराए ही घर बना लेते हैं। जिनकी जमीन विवाद से परे है और बैंक से लोन लेकर मकान बनाना होता है, वैसे लोग ही नक्शा पास करा कर मकान बनाते हैं।

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