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  • 25 Thousand Deaths In 2 Months In Rural Areas, Yet Only 5.7 Percent Of The Population Of 2.5 Crore People Got Corona Vaccine

अंधविश्वास:ग्रामीण क्षेत्रों में 2 माह में 25 हजार मौतें, फिर भी 2.5 करोड़ आबादी में सिर्फ 5.7 प्रतिशत लोगों को कोरोना का टीका

रांची6 दिन पहले
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जिलों में वैक्सिनेशन की स्थिति - Dainik Bhaskar
जिलों में वैक्सिनेशन की स्थिति
  • वैक्सीन से पहले गांवों में लगाना होगा अंधविश्वास मिटाने का टीका
  • गांवों में अंधविश्वास के कारण वैक्सिनेशन धरातल पर
  • कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच राज्य में टीकाकरण की रफ्तार जानने के लिए दैनिक भास्कर ने 22 जिले के 26,726 गांवों की पड़ताल की

झारखंड की आबादी लगभग 4 करोड़ है। इसमें 76 प्रतिशत लोग गांवों में रहते हैं। सरकारी आंकड़े के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले दो माह में 25 हजार लोगों की मौत हो गई है। हालांकि विभाग का कहना है कि ये मौतें कोरोना से नहीं हुई है। अबतक ग्रामीण इलाकों में वैक्सीन की रफ्तार काफी धीमी है। अभी 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का वैक्सिनेशन हो रहा है। शहरों में तो टीकाकरण रफ्तार पकड़ रहा है, पर ग्रामीण वैक्सीन से दूर भाग रहे हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने 22 जिलों में वैक्सिनेशन की पड़ताल की।

पता चला कि अबतक 26,726 गांवों में मात्र 5.7% ग्रामीणों का टीकाकरण हुआ। सबसे कम लातेहार में 1.77% हुआ है। साथ ही, जागरूकता के अभाव में इन गांवों में ग्रामीण तरह-तरह के टोटके कर रहे है, ताकि गांव में कोरोना न आए। यहां ऐसी अफवाह है कि टीकाकरण के बाद व्यक्ति को तेज बुखार होता है और उसकी मृत्यु हो जाती है। वहीं, शहरी इलाकों में 17.18 आबादी को टीका लग चुका है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि सबसे अधिक वैक्सीन भी लातेहार (36.6%) में ही लगी है। इसका कारण कम शहरी आबादी भी बताई जा रही है।

धीमे वैक्सिनेशन के 3 बड़े कारण

1. ग्रामीण इलाकों में कोरोना के टीके को लेकर कई तरह का अंधविश्वास फैला है। 2. अधिकांश क्षेत्र नक्सल प्रभावित होने के कारण स्वास्थ्यकर्मी भी ग्रामीण क्षेत्र में जाने से कतराते हैं। 3. वैक्सीन की कमी भी टीकाकरण अभियान में बाधा बन रही है। कई जिलों में कमी के कारण 18+ को टीका देना बंद करना पड़ा।

लोहरदगा के पेशरार प्रखंड में एक भी टीका नहीं लगा

लोहरदगा के पश्चिमी क्षेत्र के पेशरार प्रखंड के 7 गांवों में एक भी टीका अबतक नहीं लगा है। इन गांवों में करीब 6 हजार लोगों की आबादी बसती है। यह इलाका घोर नक्सल प्रभावित है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां टीका नहीं लगने के दो मुख्य कारण हैं। एक तो यहां स्वास्थ्यकर्मी आना नहीं चाहते, दूसरा अंधविश्वास की कमी के कारण वैक्सीन नहीं लेना चाहते।

विशेषज्ञ ने चेताया, गांव से आ सकती है कोरोना की तीसरी लहर

ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी से लोग वैक्सीन लेने से पीछे हट रहे हैं। वैक्सीन से कोरोना संक्रमण से बचाव हो सकता है। सर्दी, खांसी और बुखार होने पर अपनी स्वास्थ्य जांच कराएं। अगर समय पर इलाज और वैक्सीनेशन नहीं हुआ तो निश्चित तौर पर तीसरी लहर गांवों से शुरू हो सकती है। यह बेहत खतरनाक हो सकती है।

-डॉ सौरभ वार्ष्णेय, निदेशक, एम्स देवघर

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