सेंट्रल जेल से बाहर आएंगे 5 साल के 4 बच्चे:आजीवन सजा कटा रही मां की गुहार- परिजन नहीं कर रहे मदद, बच्चों को शिक्षित बना दीजिए, CWC ने लिया शिक्षा का जिम्मा

रांची6 महीने पहले
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रांची के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल से 5 साल की 4 बेटियों को मुक्ति मिलेगी। इनके नन्हे कदम जेल की चहारदिवारी से निकल कर अब स्कूल पहुंचेंगी। मां की सजा से मुक्त अब ये अपनी आजाद जिंदगी जिएंगी। दरअसल जेल प्रबंधन के अनुरोध पर बाल कल्याण समिति (CWC), रांची ने महिला बंदियों की 4 बच्चियों की पढ़ाई का जिम्मा ली है।

जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रही महिला कैदियों ने जेल प्रशासन से गुहार लगाईं थी कि उनकी बेटियों को उनकी सजा नहीं मिले और उनके लिए बेहतर शिक्षा की व्यवस्था की जाए। इसके बाद जेल प्रशासन ने CWC को लेटर लिखा था। जेल प्रशासन के अनुरोध पर CWC सदस्य बैद्यनाथ कुमार, तनुश्री सरकार और बसंती मुंडा ने ये बड़ा फैसला लिया है। सुनिए सजा काट रही मां की पीड़ा उन्हीं की जुबानी

1. मैं 2018 से जेल में हूं, मेरी बेटी को मुख्यधारा से जोड़ लीजिए
सिमडेगा जिला की आजीवन कारावास की सजा काट रही अनिता बा ने कहा कि मेरी बेटी मेरे साथ जेल में है, जिसकी उम्र पांच साल है, जबकि मैं वर्ष 2018 से जेल में बंद हूं। इसलिए आग्रह है कि मेरी बेटी को शिक्षा दिलाने की पहल शुरू की जाए।

2. जेल के बाहर कोई नहीं है, 4 वर्ष की बेटी को CWC को सौंप दीजिए
लातेहार की पूजा सुनिता देवी वर्ष 2019 से सजा काट रही है। उसने कहा कि मेरी चार वर्ष दो माह की बेटी है। जेल के बाहर ऐसा कोई नहीं है, जो मेरी बेटी की देखरेख कर सके। इसलिए मेरी बेटी की शिक्षा-दीक्षा CWC के अधीन करायी जाए।

3.परिवार से कोई मदद नहीं कर रहा, बेटे को शिक्षित करा दीजिए
सिमडेगा की सुरजीत बा भी वर्ष 2018 से जेल में बंद है। उसने आग्रह किया है वह गरीब परिवार से है और कोई मदद नहीं मिल रही है। इसलिए मेरे पांच साल के बेटे का स्कूल में नामांकन कराया जाए। वहीं खूंटी की असरिता मुंडाईन ने कहा कि मैं चाहती हूं कि मेरी छह वर्षीय बेटी के उचित लालन- पालन के साथ उसे शिक्षा से जोड़ा जाए।