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  • 40 Lakh Rural Consumers Are Unable To Pay Electricity Bills, Energy Corporation Only, Depending On Urban Consumers, Monthly Expenditure 430 Crores, Income 200 Crores

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आमदनी आधी हुई:40 लाख ग्रामीण उपभोक्ता नहीं दे पा रहे बिजली बिल, केवल शहरी उपभोक्ता के भरोसे ऊर्जा निगम, मासिक खर्च 430 करोड़, आय 200 करोड़

रांचीएक महीने पहले
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ऊर्जा सचिव सह ऊर्जा विकास निगम एवं वितरण निगम के एमडी अविनाश कुमार ने बिजली राजस्व को लेकर अफसरों के साथ बैठक की। उन्होंने हर हाल में राजस्व बढ़ाने का निर्देश दिया। कहा कि राजस्व को लेकर कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में यह बात सामने आई कि लॉकडाउन के बाद झारखंड बिजली वितरण निगम की माली हालत पूरी तरह से खराब हो चली है।

हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि केवल ग्रामीण क्षेत्रों के 60 लाख में से करीब 40 लाख उपभोक्ता नियमित तौर पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। ऊपर से बड़े डिफॉल्टरों का बिल नहीं जमा करना। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2019 में सौभाग्य योजना के तहत हर ग्रामीण को बिजली एवं बिजली कनेक्शन से जोड़ दिया गया।

मीटर भी लगा दिए गए, मगर बिजली बिल नहीं के बराबर आ रहा है। निगम से मिली जानकारी के अनुसार, शहरी क्षेत्र के 12 लाख उपभोक्ता ही अभी नियमित रूप से बिजली बिल जमा करा रहे हैं। जिसके भरोसे बिजली निगम चल रहा है। करीब 1600 मेगावाट बिजली का राजस्व प्राप्त नहीं हो पा रहा है।

35 करोड़ स्थापना मद में खर्च, वेतन के पड़ेंगे लाले

ऊर्जा निगम की तीनों अनुषांगिक कंपनियां बिजली वितरण निगम, बिजली संचरण निगम एवं बिजली उत्पादन निगम के बिजली अफसरों एवं कर्मियों के स्थापना मद में 35 करोड़ का खर्च है। अगर यही हालात रहे, तो आने वाले दिनों इनके वेतन के भी लाले पड़ सकते हैं।

रेलवे से 40 करोड़ का रेवेन्यू नहीं आ रहा, इंडस्ट्री से 75 फीसदी तक घट गया

बिजली निगम का फिक्स आय स्रोत रेलवे एवं इंडस्ट्रियल गतिविधियों पर विराम लग गया है। लॉकडाउन से उत्पन्न स्थिति के कारण रेलवे से प्राप्त होने वाला कम से कम 40 करोड़ का राजस्व नहीं मिल रहा है। ऐसा ट्रेनों के नहीं चलने एवं स्टेशन पर गतिविधियां ठप होने के कारण हुआ है। यही हालत इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं की भी है। लॉकडाउन में ज्यादातर स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एवं अन्य मंझोले व बड़े उद्योग बंद रहने, इसके बाद खुलने पर भी काम बहुत कम होने के कारण इससे प्राप्त होने वाला राजस्व 170 करोड़ से घटकर 30-40 करोड़ पर आ गया है।

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