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रांची यूनिवर्सिटी की जमीन पर कब्जा हुई आम बात:रांची विवि की जमीन पर 6 दुकानें बन रहीं, पर्यावरण दिवस पर काट दिए पेड़

रांची12 दिन पहले
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रांची यूनिवर्सिटी के मोरहाबादी कैंपस में बनाई जा रहीं दुकानें। - Dainik Bhaskar
रांची यूनिवर्सिटी के मोरहाबादी कैंपस में बनाई जा रहीं दुकानें।
  • रांची यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दर्ज कराई एफआईआर, पुलिस ने निर्माण कार्य रोका

रांची यूनिवर्सिटी के मोरहाबादी कैंपस स्थित भूमि पर कब्जा करना नई बात नहीं है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। मोरहाबादी कैंपस स्थित पीजी टीआरएल डिपार्टमेंट के आगे में तीन दुकानें पहले से ही बनी हुईं थीं। इसे तोड़कर अब तीन की जगह छह अवैध दुकानें का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच जाने के बाद विवि प्रशासन की नींद खुली है।

कुलपति डॉ. कामिनी कुमार के निर्देश पर कोतवाली थाने में अवैध निर्माण करने वाले पर प्राथमिक दर्ज कराई गई है। इसके बाद मौके पर पुलिस पहुंची और चल रहे निर्माण कार्य को रोक दिया। विवि मुख्यालय में चर्चा है कि विवि अधिकारियों और विभाग के शिक्षकों की परोक्ष रूप से सहमति के बिना अवैध निर्माण कैसे संभव है।

शिक्षकों और छात्रों में नाराजगी

अवैध दुकान के निर्माण में आड़े आ रहे कटहल पेड़ की टहनियां भी काटी गईं। ऐसा कृत्य विश्व पर्यावरण दिवस पर किया गया। इस दिन विवि द्वारा वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित कर पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दिया जा रहा था। इससे शिक्षकों और छात्रों में काफी नाराजगी है।

वीसी को दिखाया था कागजात

आरयू की वीसी प्रो. कामिनी कुमार ने इस मामले को काफी गंभीरता से लिया गया है। अवैध निर्माण करने वाले में से एक ने वीसी से मिले कागजात भी दिखाए। इसमें दो दशक पहले तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. बहुरा एक्का द्वारा दुकान के लिए भूमि देने का आदेश है। अब बड़ा सवाल यह है कि विवि का कोई अधिकारी भूमि कैसे दे सकता है।

पहले रांची विवि के पास थी 165 एकड़ भूमि

रांची विवि के पास स्थापना काल में वर्ष पहले लगभग 165 एकड़ भूमि थी। वर्तमान में आधी भूमि भी विवि के पास रह गई है। यानी विवि के मोरहाबादी कैंपस स्थित भूमि को कब्जा करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।

एफआईआर दर्ज, नहीं होगा अवैध निर्माण

यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई है। पेड़ की टहनियां काटने का मामला गंभीर है। इसमें संलिप्त लोगों पर नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. टीएन साहू, प्रॉक्टर रांची विवि

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