पारामेडिकल कर्मियों के बाद सहिया करेंगी आंदोलन:गर्भवती और बच्चों के टीकाकरण पर न हो जाए संकट, आंगनबाड़ी संचालन पर भी संशय

रांची4 महीने पहले
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पारामेडिकल कर्मियों के बाद अब सहिया करेंगी आंदोलन - Dainik Bhaskar
पारामेडिकल कर्मियों के बाद अब सहिया करेंगी आंदोलन

राज्य के पारामेडिकल कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। ऐसे में राज्यभर के पीएचसी-सीएचसी में इलाज लगभग बंद है। अब आंगनबाड़ी संचालन में भी परेशानी आ सकती है। ऐसा इसलिए हो सकता है कि राज्य में कार्यरत 42 हजार सहिया भी आंदोलन के मूड में आ गयी हैं। उन्होंने आंदोलन की रूपरेखा भी बना ली है। उन्होंने आंदोलन के ताारीख की घोषणा भी कर दी है। सभी 42 हजार सहिया 23 जनवरी से आंदोलन के मूड में हैं। इस बाबत सहिया संघ की ओर से मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री तथा स्वास्थ्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया है।
इन वजह से आंदोलन की तैयारी
राज्य में कार्यरत सहिया कई सालों से मानदेय और स्थायीकरण की मांग को लेकर आंदोलन करती रही हैं। उनका कहना है कि दो दर्जन से अधिक ऐसे काम हैं, जो हम करते हैं। उसके बदले मामूली सा मानेदय दिया जाता है। जितना पैसा दिया जाता है, वह सम्मानजनक नहीं है। सहिया की मांगों में दो हजार प्रोत्साहन राशि की जगह 18 हजार रुपये मासिक मानदेय, ईपीएफ भुगतान तथा नियमावली लागू कर सरकारी कर्मी का दर्जा देना शामिल हैं।
दो हजार रुपये में गुजारा नहीं संभव
संघ से मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के सभी कार्यक्रमों सहित दो दर्जन से अधिक तरह के काम हम करते हैं। लेकिन उन्हें महज दो हजार रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है। इससे उनका जीवन यापन मुश्किल होता है। सहिया के जिम्मे सुरक्षित मातृत्व, जच्चा-बच्चा की सुरक्षा, टीकाकरण अभियान, पल्स पोलियो अभियान, कुष्ठ रोगी की पहचान, फाइलेरिया एवं रोगी की पहचान कर डॉट्स दवा मरीजों को उपलब्ध करवाना, गर्भवती महिलाओं का एएनसी, कैंसर कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करवाना, सामुदायिक स्वास्थ्य बैठक करवाना, सरकार की सारी स्वास्थ्य योजनाएं घर तक पहुंचाने जैसे काम हैं।
हेमंत सरकार ने स्थायीकरण करने की है घोषणा
हेमंत सोरेन की सरकार ने राज्य में कार्यरत संविदा आधारित कर्मचारियों को स्थायी करने की बात कही है। सेवा शर्तों में सुधार के उद्देश्य से ऐसे कर्मचारियों का विस्तृत ब्योरा जुटाया जा रहा है। कार्मिक विभाग ने सभी विभागों को पत्र लिख कर उनके सभी कार्यालयों में अनुबंध और संविदा पर कार्यरत कर्मियों का ब्योरा 15 दिनों के अंदर उपलब्ध कराने को कहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि राजस्थान और ओड़िशा सरकार की तर्ज पर झारखंड सरकार भी संविदा कर्मियों को नियमित करने के उद्देश्य से ‘संविदा भर्ती नियम-2023‘ लागू कर सकती है। सरकार के कार्मिक विभाग ने विभिन्न विभागों के मुख्यालयों से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों तक को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां वर्षों से अनुबंध और संविदा पर कार्यरत कर्मियों की रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
विभिन्न सेवाओं में कार्यरत अनुबंधकर्मी

  • मनरेगा : 5000
  • समाज कल्याण : 90,000
  • बीआरपी-सीआरपी : 4500
  • एनआरएचएम : 70000
  • डीआरडीए : 2700
  • शिक्षा परियोजना : 2900
  • एनएसीओ : 3500
  • एएनएम-जीएनएम : 2000
  • यक्ष्मा : 2000
  • कृषक मित्र :18000
  • ऊर्जा मित्र : 6000
  • उद्यान मित्र : 4500
  • मत्स्य मित्र : 4500
  • श्रमिक मित्र : 2000
  • आत्मा कर्मी : 2200
  • होमगार्ड्स : 18000
  • एसबीएम-पीएचडी : 3600
  • जल सहिया : 45000
  • स्वास्थ्य सहिया : 4500
  • रसोईया : 75000
  • मॉडल विद्यालय शिक्षक : 500
  • समावेशी शिक्षा कर्मी : 300
  • 14वें वित्त कर्मी : 5700
  • यूनानी-आयुर्वेद डॉक्टर : 500
  • पीएम आवास : 200
  • डीसीपीयम/आईसीपीएस कर्मी : 300
  • कम्प्यूटर आपरेटर : 2900
  • इ-गर्वमेंट सोसाइटी : 332
  • सहायक पुलिस : 10000
  • जेएसएलपीएस : 55000
  • तेजस्विनी : 45000
  • जैक कर्मी : 800
  • श्रमिक विद्यालय : 250
  • पंचायती राज : 4500
  • उद्योग समन्वयक : 80000
  • प्रधान अध्यक्ष शिक्षा समिति : 39000
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