असर-2021 की रिपोर्ट:झारखंड में कोरोना इफेक्ट के बाद 58 प्रतिशत बच्चे ट्यूशन पढ़ने लगे

रांची2 महीने पहले
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  • देश में पहली बार सरकारी स्कूलों में एडमिशन सात प्रतिशत अधिक, निजी में नौ प्रतिशत घटे

शिक्षा की 16वीं एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (ग्रामीण)- 2021 बुधवार को जारी की गई। इसके अनुसार झारखंड में 5-16 वर्ष के बच्चों की पढ़ाई में ट्यूशन का चलन तेजी से बढ़ा है। 2018 में जहां 44% बच्चे ट्यूशन जाते थे, वहीं कोरोना के बाद 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर 57.6% हो गया है। यानी 13.5% ज्यादा बच्चे अब शुल्क देकर ट्यूशन ले रहे हैं।

जबकि देश में इस दौरान यह आंकड़ा 10.6% ही बढ़ा है। वहीं, 2018 की तुलना में 2021 में राज्य के सरकारी स्कूलों में नामांकन लेने वाले विद्यार्थी 76.1% से बढ़कर 78.6% हो गए। देश में पहली बार सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले 6-14 साल के बच्चे बढ़कर 2021 में 70.3% तक पहुंच गए।

2018 में ये 64.3% थे। वहीं, निजी स्कूलों में एडमिशन लेने वाले घटकर 24.4% पर सिमट गए, जो 2018 में 32.5% थे। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह रही आर्थिक तंगी। क्योंकि, सबसे ज्यादा 62.5% मामलों में अभिभावकों ने पैसों की कमी के कारण स्कूल बदला।

देश में हर 100 में से 70 बच्चे पहुंचे सरकारी स्कूल

बदलाव के 5 बड़े कारण

62.4% आर्थिक तंगी 49.1% मुफ्त सुविधाएं 40.4% पढ़ाई नहीं होना 15.5% पलायन 5.3% शादी/रोजगार

देश में 11 साल पीछे खिसके निजी स्कूल

देश के निजी स्कूलों के नामांकन में पहली बार 2020 से कमी आई। तब यह 6-14 आयुवर्ग में 2018 के 32.5% से लुढ़ककर 28.8% पर आ गया। इससे पहले 2006 से 2014 के बीच इसमें लगातार बढ़ोतरी हुई। 2018 तक यह 30% के आसपास रहा। अब यह फिर 2010 के स्तर (25%) के पास आ गया है। वहीं, 2018 में जहां देश में 28.6% बच्चे पेड ट्यूशन लेते थे, वहीं 2021 में यह आंकड़ा 39.2% तक पहुंच गया।

पढ़ाई में फैमिली का साथ घटा
2020 में देश में घर पर पढ़ने वाले तीन चौथाई बच्चों को फैमिली का सहयोग मिलता था। 2021 में यह दो तिहाई ही रह गया। कक्षा 9 से ऊपर वालों में ज्यादा गिरावट है।

दोगुने घरों में पहुंचा स्मार्टफोन
2018 में देश में 36.5% घरों में ही स्मार्टफोन था। 2021 में 67.6% तक पहुंच गया। सरकारी स्कूल के 63.7% और निजी के 79% बच्चों के लिए स्मार्टफोन उपलब्ध हैं।

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