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रिम्स की उपलब्धि:पत्नी की मौत के बाद पति ने लिया नेत्रदान का निर्णय रिम्स में 2 मरीजों में कॉर्निया ट्रांसप्लांट अब देखेंगे दुनिया

रांची3 महीने पहले
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ऑपरेशन सफल होने के बाद मरीज और डॉक्टर। - Dainik Bhaskar
ऑपरेशन सफल होने के बाद मरीज और डॉक्टर।
  • 50 साल की शिक्षिका की सड़क हादसे के बाद इलाज के दौरान हुई मौत

दो दिनों में रिम्स के आई डिपार्टमेंट ने दो मरीजाेें का नेत्र प्रत्यारोपण (कॉर्निया ट्रांसप्लांट) कर उन्हेें दुनिया देखने का मौका दिया है। दरअसल, बीते दिनों धनबाद में एक 50 साल की शिक्षिका स्कूल जाने के दौरान सड़क हादसे में घायल हो गई थी। रिम्स में इलाज के दौरान दो दिन पहले मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद पति ने नेत्रदान करने का निर्णय लिया।

उन्होंने तुरंत नेत्र विभाग व आई बैंक के अधिकारियों से संपर्क कर नेत्रदान की इच्छा जताई। आई डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. राजीव गुप्ता की टीम तुरंत मृत शिक्षिका की कॉर्निया निकाली और उसे आई बैंक में रखा गया। इसके बाद एक कॉर्निया को भोजपुर के 26 वर्षीय मरीज व दूसरे कॉर्निया को डोरंडा की 67 वर्षीय महिला में ट्रांसप्लांट किया गया। डॉ. राजीव गुप्ता के अनुसार, दोनों जल्द दुनिया देख सकेंगे।

क्या है डाल्क? : डीएएलके (डीप एनटीरियर लामेलर किरेक्टोप्लास्टी) यह कॉर्निया के आंशिक परत का प्रत्यारोपण है। इसमें नेत्रदाता के कॉर्निया की तीन परत को प्रयोग में लाया जाता है। प्राप्तकर्ता के कॉर्निया के केवल एक परत में उसे ट्रांसप्लांट किया जाता है।

भोजपुर के अमित को मिली आंखों की रोशनी
डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि भोजपुर के मरीज अमित कुमार की दोनों आंखें केराटोकोनस (कॉर्निया बाहर की ओर उभर जाना) के कारण खराब हो गई थी। इस कारण वे देखने में असमर्थ थे। मरीज के परिजनों ने कहा कि वे कई सालों से इलाज कराकर परेशान हो चुके थे। रिम्स लाने के बाद यहां के चिकित्सकों ने अमित को दुनिया देखने के लिए आंखें दोबारा से वापस कर दी। उन्होंने धनबाद की शिक्षिका के पति का भी आभार जताया। डाॅक्टरों ने बताया कि मरीज का कॉर्निया ट्रांसप्लांट डाल्क टेक्निक से किया गया।

मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद चली गई थी रोशनी

डोरंडा निवासी 67 वर्षीय मंजू देवी का पूर्व में ही मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद आंख की रोशनी चली गई थी। उनका भी कॉर्निया का सफल प्रत्यारोपण किया गया। ऑपरेशन नेत्र रोग विभाग के एचओडी डॉ. राजीव गुप्ता की देखरेख में डॉ. सुनील कुमार व उनकी टीम ने किया। इसमें आई बैंक के प्रबंधक अभिमन्यु कुमार, मो. सफी असलम, परवेज आदि ने सहयोग किया।