100 रसूखदारों पर 12 करोड़ बकाया:एजी ने जताई आपत्ति...जिन्हें जरूरत नहीं, उन्हें भी सरकारी खर्च पर बॉडीगार्ड दे दिए गए

रांची3 महीने पहलेलेखक: विनय चतुर्वेदी
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बकाया बढ़कर लाखों रु. हो गए, पर सुरक्षा नहीं हटी। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
बकाया बढ़कर लाखों रु. हो गए, पर सुरक्षा नहीं हटी। (फाइल फोटो)

झारखंड में गैर सरकारी लाेगाें काे बाॅडीगार्ड देने में भारी गड़बड़ी हुई है। राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में आकर पुलिस प्रशासन ने रसूखदाराें काे पेड बाॅडीगार्ड ताे उपलब्ध करा दिया, लेकिन उनसे वसूली नहीं कर पा रहा है। राज्य में ऐसे करीब 100 लाेगाें के पास 12 कराेड़ रुपए बकाया वसूलना है। इनमें राजनेता के साथ व्यवसायी, डाॅक्टर और मीडिया घराने के लाेग भी शामिल हैं। महालेखाकार (एजी) ने इस पर आपत्ति जताई है।

एजी की रिपाेर्ट में कहा गया है कि बाॅडीगार्ड की प्रतिनियुक्ति के लिए राज्य, प्रमंडल और जिला स्तर पर कमेटियां हैं। राज्य स्तर पर तीन माह, प्रमंडल स्तर पर दाे माह और जिला स्तर में एक माह में बैठक हाेनी चाहिए। एजी की रिपाेर्ट के अनुसार कुछ जिलाें में ताे चार-पांच सालाें से बैठक हुई ही नहीं। लातेहार में तो तत्कालीन एसपी के मौखिक आदेश पर ही बॉडीगार्ड दे दिए गए।

इन प्रमुख लाेगाें पर है बकाया

  • डाॅ. एचपी नारायण (न्यूराेसर्जन) : 14 लाख
  • विजय धानुका (व्यवसायी) : 13 लाख
  • अनूप चावला (व्यवसायी) : 14 लाख
  • डाॅ. एसएन यादव (हड्डी राेग विशेषज्ञ): 14 लाख
  • डाॅ. जेड हाेदा (व्यवसायी) : 14 लाख
  • राजकुमार अग्रवाल (व्यवसायी) : 13 लाख

इनपर भी है बकाया

मंजूर अंसारी, सिद्धांत जैन, आदित्य धानुका, रंजन लाल नाथ शाहदेव, धनंजय कुमार सोनी, डॉ. विनीत राज, डॉ. विनिता प्रसाद, प्रदीप कुमार वर्मा, विकास धानुका, श्रवण जैन, अमर बंसल, रंजन कुमार, सोनू अग्रवाल, कृपा शंकर सिंह, विनय सिंह, विष्णु अग्रवाल, आशीष भाटिया, कुश भाटिया, अमित प्रकाश।

पढ़िए... बकाएदारों के तर्क और एजी ने रिपोर्ट में क्या गड़बड़ियां गिनाईं

इतनी तो पेंशन भी नहीं

डाॅ. एचपी नारायण ने कहा-हमने प्रशासन काे लिखकर दे दिया है कि यह राशि हमारी पेंशन से बहुत अधिक है। हम इतने रुपए नहीं दे सकते। अभी हमारे पास काेई बाॅडीगार्ड नहीं है।

पता नहीं था, पैसे देने हैं

व्यवसायी विजय धानुका ने कहा-परिवार में एक सदस्य की हत्या के बाद हमें सरकार की ओर से बाॅडीगार्ड मिला था। पता नहीं था कि पैसे देने हाेंगे। जब नाेटिस आया ताे बाॅडीगार्ड हटा दिया।

मैंने बाॅडीगार्ड मांगे ही नहीं थे

व्यवसायी अनूप चावला ने कहा-मुझे अपराधियाें ने चार गाेलियां मारी थीं। इसके बाद सरकार ने चार बाॅडीगार्ड दिया था। हालांकि मैंने बाॅडीगार्ड मांगे नहीं थे और बाद में दाे लाैटा दिए। जब मेरे पास बकाए का नाेटिस आया ताे तत्कालीन डीजीपी काे लिखकर दिया था कि न मैं पैसे देने की स्थिति में हूं और न ही बाॅडीगार्ड चाहिए।

  • पलामू एसपी ऑफिस ने पूरे रजिस्टर नहीं दिए : एजी की रिपाेर्ट में कहा गया है कि लेखा परीक्षा के दाैरान पलामू एसपी ऑफिस ने सुरक्षा गार्ड से संबंधित पूरे रजिस्टर नहीं दिए। पलामू में गैरजरूरी लोगों को बाॅडीगार्ड देने में अनियमितता के साथ राजस्व की हानि भी हुई है।
  • धनबाद में सरकारी खर्च पर दे दिया बाॅडीगार्ड : धनबाद में गलत तरीके से सरकारी खर्च पर बाॅडीगार्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं। इससे 48.50 लाख खर्च हुए। बाॅडीगार्ड की प्रतिनियुक्ति में गृह विभाग के मानदंडाें की भी अवहेलना की गई। यहां सुरक्षाबलाें के बाॅडीगार्ड के रूप में दुरुपयाेग की संभावना भी जताई गई है।
  • लातेहार में एसपी के माैखिक आदेश पर मिल गया बाॅडीगार्ड : लातेहार में सक्षम स्वीकृति के बिना ही सरकारी खर्च पर बाॅडीगार्ड दे दिए गए। ये बाॅडीगार्ड प्रतुलनाथ शाहदेव, अनीता देवी, लाल मनाेज नाथ शाहदेव, शंकर रेड्डी और लाल माेती नाथ शाहदेव को दिए गए। शंकर रेड्डी काे ताे जिला सुरक्षा समिति की सहमति के बगैर ही तत्कालीन एसपी के माैखिक आदेश पर बाॅडीगार्ड मिल गया।

सीधी बात - एवी होमकर, आईजी अभियान सह पुलिस प्रवक्ता

बकाएदारों को लगातार नोटिस भेज रहे हैं, कार्रवाई का भी निर्देश

बाॅडीगार्ड की राशि देने का क्या नियम है?
-बाॅडीगार्ड देने और शुल्क वसूली के बारे में जिला स्तरीय सुरक्षा समिति तय करती है। कभी-कभी तीन महीने का एडवांस भी लिया जाता है।

पेड बाॅडीगार्ड के करीब 12 कराेड़ रुपए बकाया हैं। इसकी वसूली कैसे हाेगी?
-बकाया भुगतान करने के लिए जिला स्तरीय सुरक्षा समिति बकाएदाराें काे लगातार नाेटिस भेज रही है।

नाेटिस के बाद भी ताे भुगतान नहीं हाे रहा?
-इस संबंध में नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। पैसे न देने वालों पर कार्रवाई होगी।

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