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पिछड़ों को 27% आरक्षण देने:सभी राजनीतिक दल राजी, पिछड़ाें का आरक्षण बढ़ाने काे लेकर विपक्ष के साथ सत्तारूढ़ कांग्रेस भी बना रही दबाव

रांची2 महीने पहले
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राज्य में पिछड़ाें के आरक्षण पर विपक्षी दल भाजपा और आजसू पार्टी जहां लगातार मुखर हैं, सत्तारूढ़ कांग्रेस भी इसकाे लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रही है। सत्तारूढ़ तीनाें दलाें कांग्रेस, झामुमाे और राजद ने विधानसभा चुनाव 2019 में अपने घाेषणा पत्र में उनकी सरकार बनने पर पिछड़ाें काे 27% आरक्षण देने का वादा किया था।

  • चुनाव घोषणापत्र में किए वादे को पूरा करेंगे

झामुमाे... वादे पर अमल करने के लिए पार्टी कमिटेड
2019 के विधानसभा चुनाव से पूर्व अपने घोषणा पत्र में झामुमो ने राज्य के पिछड़ों को 27% आरक्षण देने का वादा किया था। पिछले दो वर्ष से झामुमो के बड़े नेता भी इस पर अमल की बात कह रहे हैं। महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य का कहना है कि सरकार पार्टी द्वारा जनता से किये गए वादों पर अमल करने के लिए कमिटेड है। कब तक के सवाल पर भट्टाचार्य ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया शुरू तो होने दीजिए। पिछड़ों को 27% आरक्षण मिलेगा। संकेत साफ है कि झामुमो आरक्षण के तय फार्मूले पर संशोधन का संकेत दे रहा है।

कांग्रेस : सीएम के साथ बैठक में विधायक रख चुके हैं बात
कांग्रेस की साेच यह है कि जनता से किया गया वादा पूरा हाेना चाहिए। इसकाे लेकर वह प्रयास कर रही है कि पिछड़ाें काे जल्द से जल्द 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। इसके लिए कांग्रेस ने मानसून सत्र के दाैरान ही इससे संबंधित विधेयक लाने का प्रयास किया था। कांग्रेस के सभी विधायक जब हाल ही में सीएम से मिले, तब भी उन्हाेंने इस मुद्दे पर सीएम से बात कर उन पर दबाव डालने का प्रयास किया था। प्रदेश कांग्रेस ओबीसी विभाग के चेयरमैन अभिलाष साहू कहते हैं, उनकी पार्टी जल्द से जल्द पिछड़ाें के लिए 27% आरक्षण चाहती है।​​​​​​​

  • सिर्फ बयानबाजी हो रही, काम कुछ नहीं हुआ

​​​​​​​​​​​​​​भाजपा : कांग्रेस कर रही आंदोलन की नौटंकी
भाजपा पिछड़ों को 27% आरक्षण देने के पक्ष में है। चुनाव पूर्व जारी संकल्प पत्र में भी इसे शामिल किया गया था। आजकल चल रहे पार्टी के विभिन्न आंदोलनों में इस विषय पर सरकार में शामिल झामुमो, कांग्रेस और राजद को घेरने का सिलसिला भी कायम है। प्रदेश महामंत्री आदित्य साहू ने आरक्षण पर कांग्रेस के धरने को नौटंकी करार दिया है। कहा है कि अगर वह पिछड़ों की हितैषी है, तो पहले सरकार से समर्थन वापस ले और फिर आंदोलन करे। सत्ताधारी दल आरक्षण बढ़ाना नहीं चाहते।

आजसू : सरकार की आंख खुलने तक होगा आंदोलन
आजसू पार्टी पिछड़ाें काे 27% आरक्षण दिए जाने को लेकर सबसे ज्यादा सक्रिय है। पार्टी की ओर से इसके लिए लंबे समय तक सामाजिक न्याय यात्रा निकाली गई। इसके बाद पार्टी के बैनर तले ही पिछड़ा वर्ग महासभा का सम्मेलन बुलाकर 27 फीसदी आरक्षण की मांग जाेरदार तरीके से रखी गई। 10 दिसंबर काे राज्य के सभी प्रखंडाें में और 21 दिसंबर काे सभी जिलाें में आजसू पार्टी द्वारा सामाजिक न्याय सभा की जाएगी। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डॉ. देव शरण भगत ने कहा कि जब तक सरकार की आंख नहीं खुलती है, आंदोलन जारी रहेगा।

राजद : छह माह पूर्व ही सीएम को ज्ञापन दिया है
प्रदेश राजद वैसे ताे पिछड़ाें काे 27% आरक्षण की वकालत लगातर ही करता रहा है, लेकिन इसकाे लेकर राजद की काेई खास गतिविधि पिछले दाे सालाें में नजर नहीं आई। पार्टी के पूर्व प्रवक्ता डॉ. मनाेज कुमार का दावा है कि छह माह पूर्व राजद की ओर से सीएम काे इसके लिए ज्ञापन दिया गया था। प्रदेश राजद की नई कमेटी आने के बाद इस मुद्दे पर आवश्यक निर्णय लेगी। ​​​​​​​

माले : आरक्षण बढ़े और नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू हो
भाकपा माले पिछड़ों को आरक्षण बढ़ा कर 27% करने के पक्ष में है। इसके लिए पार्टी लगातार आंदोलन कर रही है। पार्टी विधायक विनोद कुमार सिंह ने कहा कि आरक्षण तो बढ़ना ही चाहिए, पर इस समय सबसे जरूरी है विभिन्न विभागों में खाली पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने वर्ष 2021 को नियुक्ति वर्ष कहा था, ऐसे में उन्हें अपने वचन की रक्षा करनी चाहिए।​​​​​​​

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