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  • Ambulance And Officers' Convoy Left From Medica In The Evening As Green Corridor, Jagranath Mahato Was Taken To The Airport In 14.30 Minutes

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कोरोना से जंग:ग्रीन कॉरिडोर बना शाम में मेडिका से निकला एंबुलेंस और अफसरों का काफिला, 14.30 मिनट में जगरनाथ महतो को पहुंचाया गया एयरपोर्ट

रांची2 महीने पहले
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  • शिक्षा मंत्री को फेफड़े की जगह ऑक्सीजेनरेटर लगा, 3.5 घंटे में एमजीएम चेन्नई पहुंचे

शिक्षा मंत्री जगरनाथ महताे की स्थिति बिगड़ने के बाद बेहतर इलाज के लिए बुधवार काे उन्हें एयर एंबुलेंस से चेन्नई भेज दिया गया। बरियातू स्थित मेडिका अस्पताल से एयरपाेर्ट तक इसके लिए ग्रीन काॅरिडाेर बनाया गया, जहां वे साढ़े चाैदह मिनट में पहुंच गए, इसके बाद 8.45 बजे चेन्नई पहुंचे। उनका इलाज चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर अस्पताल में शुरू हो गया। जाने माने कार्डियाेथाेरेक सर्जन व अस्पताल के प्रमुख डाॅ. केआर बालाकृष्णन उन्हें देख रहे हैं। फेफड़ाें के इलाज और ट्रांसप्लांट के लिए यह देश के सबसे अच्छे अस्पतालाें में एक है।

रिम्स के क्रिटिकल केयर के प्रमुख प्रदीप भट्टाचार्य से समझें... चार घंटे की जद्दाेजहद

शिक्षा मंत्री जगरनाथ महताे की स्थिति रविवार काे काफी बिगड़ गई, पहले से नब्बे प्रतिशत खराब फेफड़ाें ने काम करना लगभग बंद कर दिया, शरीर में ऑक्सीजन का लेबल गिरने लगा, इसे साै के आस-पास हाेना चाहिए जाे रात 11 बजे तक घटकर पचास तक पहुंच गया। काेराेना में फेफड़ाें काे बचाना ही सबसे महत्वपूर्ण हाेता है, यही चुनाैती अब मेडिका में जगरनाथ महताे काे बचाने में जुटी डाक्टराें की टीम की थी। रिम्स के क्रिटिकल केयर के प्रमुख प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया रविवार रात 11.30 बजे चेन्नई एमजीएम की टीम मेडिका पहुंची, अब तक वेंटिलेटर की पूरी क्षमता लगा दी गई थी, बावजूद इसके ऑक्सीजन लेवल ठीक नहीं हो रहा था। तय किया गया कि वेंटिलेटर के साथ एक्स्ट्रा काेरपाेरियल मेंब्रेन आक्सीजनरेटर लगाएंगे। यह एक ऐसी मशीन है, जिसे फेफड़े के विकल्प के रूप में लगाया जाता है। इसमें दाे नली लगी हाेती है, एक से शरीर से रक्त आता है।

मशीन में ऑक्सीजन मिलता है और यह फिर शरीर में चला जाता है, इससे शरीर में ऑक्सीजन मेंटेन हाे जाता है और फेफड़े का पूरा काम इस मशीन से हाेने लगता है। फेफड़ा पूरी तरह रेस्ट में हाे जाता है। साथ ही ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिससे खून पतला हाेता रहे। इसके लिए हिपरिन का डाेज बढ़ाई गई है। सोमवार सुबह 3.30 बजे यह प्रक्रिया पूरी की गई। प्रक्रिया पूरी हाेते ही अब हम ऑक्सीजन का लेवल एडजस्ट कर सकते थे, पांच मिनट में लेवल साै तक पहुंच गया। साेमवार की सुबह पांच बजे तक माॅनिटरिंग की गई और अब वेंटिलेटर और ऑक्सीजेनरेटर के अलावा पूरी व्यवस्था के साथ, एक्सपर्ट की टीम की देख-रेख में उन्हें चेन्नई ले जाया गया है। मेडिकल टीम में मेडिका के डाॅ. विजय मिश्रा, रिम्स के डाॅ. प्रदीप भट्टाचार्या, डाॅ जुनैद अंसारी, एमजीएम चेन्नई के लंग्स ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट डाॅ. केआर बालकृष्ण्ण के सहयाेगी डाॅ. अपार जिंदल, डाॅ मुरली कृष्णण शामिल रहे।

अब आगे क्या...
चेन्नई में अगलेे तीन सप्ताह तक हर सप्ताह उनके फेफड़े की कार्यक्षमता की मानिटरिेंग हाेगी, इसमें सुधार हाेने पर आक्सीजेनरेटर हटा दिया जाएगा, ऐसा नहीं हाेने पर लंग्स ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

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