दो सिर वाला बच्चा हुआ तो छोड़कर भाग गए माता-पिता:RIMS के डॉक्टरों ने दिया जीवनदान; ऑपरेशन कर एक सिर को हटाया, अब पालेंगे भी

रांची11 दिन पहले
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मां को पहले से पता था कि बच्चा असामान्य है। जन्म के साथ ही बच्चे को छोड़ कर फरार हो गई। - Dainik Bhaskar
मां को पहले से पता था कि बच्चा असामान्य है। जन्म के साथ ही बच्चे को छोड़ कर फरार हो गई।

रांची में एक निर्दयी मां अपने दुधमुंहे बच्चे को जन्म के साथ ही छोड़कर भाग गई। फर्जी पता के साथ हॉस्पिटल में एडमिट हुई मां ने नवजात को उसके हिस्से का पहला दूध तक नहीं पिलाया। उसका कसूर बस इतना था कि वह जन्म से ओसिपिटल मेनिनजो इंसेफालोसिल नामक बीमारी से पीड़ित था।

इस बीमारी में सिर के पीछे का भाग बाहर निकलकर एक थैली की तरह बन जाता है, और यह दो सिर की तरह दिखता है। यह हिस्सा ब्रेन और स्किन से भी जुड़ा रहता है।

बताया जाता है कि महिला 15 दिन पहले बोकारो का पता लिखवाकर राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) रांची में एडमिट हुई थी। बच्चा होने के बाद वह चुपके से निकल गई। बच्चे की रोने की आवाज सुनकर सिस्टर गई तो देखा कि मां उसके साथ नहीं थी। काफी खोजबीन की गई। नहीं मिली तो अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस से संपर्क किया। जब उसके पते की जांच की गई तो फर्जी पाया गया। इसके बाद डॉक्टरों की एक टीम ने उसे गोद लेने का निर्णय लिया।

ऑपरेशन कर उसके सिर से अतिरिक्त हिस्से को हटा दिया। फिलहाल मासूम ICU में है। 10 दिन बाद उसे छुट्‌टी मिल जाएगी। अभी बच्चे की देखरेख करुणा संस्था कर रही है। यह डॉक्टरों की ओर से संचालित एक NGO है।

2 घंटे के ऑपरेशन के बाद हटाया गया दूसरा सिर, सब कुछ फ्री

RIMS में न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. सहाय ने बताया, 'डॉक्टरों की टीम ने 2 घंटे तक ऑपरेशन कर बच्चे के सिर से अतिरिक्त गठरी को हटा दिया है। दवा से लेकर जांच तक सब कुछ फ्री है। ऑपरेशन में मेरे अलावा डॉ. पीयूष, डॉ. तारीक, डॉ. विकास, डॉ. गौरव और डॉ. मनीषा कुमार समेत अन्य SR व JR शामिल थे।'

जानिए बीमारी की गंभीरता

दैनिक भास्कर ने RIMS के डॉक्टर सीबी सहाय से जाना बीमारी की गंभीरता, इसके दुष्प्रभाव और इसके कारण...

सवाल- मेनिनजो इंसेफालोसिल किस प्रकार की बीमारी है?
जवाब- यह एक जन्मजात बीमारी है। इसमें खोपड़ी के हड्‌डी से पार्ट बाहर निकल जाते हैं। सिर के बाहर एक थैली के रूप में जमा हो जाते हैं। खोपड़ी के हिस्से के साथ इसमें स्किन भी जुड़ा रहता है। जीवन भर बच्चे को इससे जूझना पड़ेगा। इसके साथ अन्य बीमारियों के होने होने की संभावन बनी रहती है। जैसे स्पाइनल कॉर्ड के भी बाहर आने के चांस रहते हैं। इसे मेनिंनजो माइनोसील कहते हैं।

सवाल- बच्चे को किस प्रकार की परेशानी हो सकती है?
जवाब- हाथ पांव में कमजोरी। माथे में पानी भर जाना। पेशाब पर नियंत्रण नहीं सहित अन्य परेशानियों से उसे जीवन भर जूझना पड़ता है।

सवाल- इस बीमारी से कैसे बचा जा सकता है?
जवाब- महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान फॉलिक एसिड का उचित मात्रा में सेवन करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान 2-3 बार अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए।

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