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जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन नहीं आने और टीकाकरण की धीमी रफ्तार:भास्कर ने स्वास्थ्य मंत्री को घेरा मंत्री बोले, तीसरी लहर की तैयारियों के लिए अहम जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की खरीद में विभाग से चूक हुई

रांची4 महीने पहले
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देश के विभिन्न राज्याें में ओमिक्राेन की जांच में काम आने वाली जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की खरीदारी काफी पहले हाे चुकी है। झारखंड इस मामले में काफी पिछड़ गया। आठ माह तक फाइल घूमती रही। अब कभी भी मशीन आ सकती है।

विलंब के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि करीब 25 दिन किसी कारण से विलंब हुआ है, पर मशीन अब पहुंचने वाली है। एक नई ट्रू नेट मशीन, जिसमें ओमिक्राेन की जांच किट लग सकती है, की भी खरीदारी की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री से साेमवार काे विशेष संवाददाता बिनाेद ओझा ने सीधी बात की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश...

भास्कर सवाल... मशीन नहीं आई, कैसे होगी जांच? मंत्री ने कहा- ओमिक्राेन की जांच के लिए नए तरह की ट्रू नेट मशीन खरीदी जाएगी

  • Q. राज्य में तीसरी लहर सबसे तेज रही। जबकि तीसरी लहर की तैयारियों के लिए वैक्सिनेशन और जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की खरीदारी में विभाग चूक गया। जीनोम सिक्वेंसिंग की फाइल आईसीएमआर, रिम्स और विभाग में 8 माह तक घूमती रह गई। नतीजतन आज तक मशीन नहीं आई?
  • - मशीन खरीद के मामले में विभाग से प्रक्रियात्मक चूक हुई। आठ महीने तो नहीं, लेकिन कुछ दिनों का बिलंब जरूर हुआ। लेकिन अब इसमें तेजी लाकर भरपाई की कोशिश कर रहे हैं। मशीन का ऑर्डर चला गया है। एक नए किस्म की ट्रू नेट मशीन के बारे में भी जानकारी मिली है, जिसमें ओमिक्राेन की जांच का किट लग सकता है। उस मशीन की भी खरीदारी की जाएगी।
  • Q. चूक के लिए किसे जिम्मेवार मानते हैं, उसके खिलाफ क्या कार्रवाई करेंगे?
  • - चूक किसी व्यक्ति की नहीं है। अफसर विशेष के तबादले और अवकाश में रहने की वजह से फाइल के मूवमेंट में थाेड़ा विलंब हुआ।
  • Q.टीकाकरण की इतनी धीमी रफ्तार क्यों है और इसके लिए कौन जिम्मेवार है?
  • - मैनपावर की एक बड़ी कमी है। सबसे ज्यादा परेशानी इसी को लेकर है। जिस तरह से केंद्र से गाइडलाइन आती है, उसके अनुरूप मैनपावर नहीं है।
  • Q. स्वास्थ्यकर्मियाें, फ्रंटलाइनर और 60 प्लस के लाेगाें का टीकाकरण भी शत प्रतिशत नहीं हो पाया। टीनएजर्स के वैक्सिनेशन में भी झारखंड सुस्त क्यों रहा?
  • -ऐसी बात नहीं है। अभी हमें परसेंटेज याद नहीं है, पर वर्तमान में टीकाकरण की गति तेज हुई है।
  • Q. आपने ऑक्सीजन प्लांट ताे लगा दिया, लेकिन उसे चलाने वाले तकनीशियन ही नहीं हैं, कैसे काम हाेगा?
  • - ऑक्सीजन प्लांट के लिए कुछ तकनीशियन काे अनुबंध पर रखा गया, कुछ और लोगों काे रखा जाएगा। इसके अलावा कई लाेगाें काे इसके लिए ट्रेनिंग भी दी गई है, जाे काम भी शुरू कर चुके हैं।
  • Q. जमशेदपुर के सिविल सर्जन डॉ. एके लाल काे विधानसभा का चुनाव लड़ने के बाद भी नाैकरी से नहीं हटाया गया, उन्हें बचाने का आराेप आप पर लगाया जा रहा है?
  • - आराेप यह है कि उन्हाेंने अविभाजित बिहार में चुनाव लड़ा था। उनका कहना है कि उस समय इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था। इस मामले में बिहार से एक माह के भीतर जानकारी मांगी गई है। जानकारी मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। बिना किसी आधार के कार्रवाई कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है।
  • Q. डॉ. लाल विभागीय कार्रवाई में दोषी पाए गए हैं। बिहार सरकार को 9 दिसंबर 2021 को पत्र भेजा गया था। इस हिसाब से तो एक महीना हो गया, अब क्या करेंगे?
  • - तय सीमा के तहत ही कार्रवाई करेंगे। जल्द ही फाइल मांगाकर इस मामले में न्यायसंगत निर्णय लेंगे।
  • Q. केंद्र सरकार लगातार स्वास्थ्य में बजट बढ़ाने पर जोर दे रही है जबकि झारखंड में उपलब्ध बजट भी कम खर्च हो रहा है क्यों?
  • - तत्कालीन विभागीय सचिव डॉ. नीतिन मदन कुलकर्णी के समय बजट घटा दिया गया था और कम खर्च किया गया था। इसके बाद अब स्थिति वैसी नहीं है।
  • Q. टीकाकरण में झारखंड काफी पीछे है, ऐसे में काेराेना पर काबू कैसे पाया जा सकता है? आप जागरूकता कम होने की बात कर रहे हैं, जागरूकता फैलाना किसके जिम्मे है?
  • - टीकाकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एक दिसंबर से 15 जनवरी तक के लिए कटऑफ डेट तय किया गया था। इस दाैरान 70 लाख लाेगाें काे टीके लगाए गए। हालांकि जागरुकता की कमी से भी टीकाकरण थाेड़ा प्रभावित हुआ है। देखेंगे कहां कमी रह गई।
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