फ्रॉड केस में अयांश के पिता ने किया सरेंडर:10 साल बाद रांची के कोर्ट में हुए हाजिर, पटना से जर्नलिस्ट के साथ पहुंचे रांची, सरेंडर करने से पहले कहा- बेटे के इलाज के लिए खुद को जेल भेज रहा हूं

रांची9 महीने पहले
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पटना का अयांष स्पाइनल मस्कुलर एस्ट्राफी (SMA) नामक बीमारी से पीड़ित है। इसे 16 करोड़ के इंजेक्शन की जरूरत है जिसके लिए एक NGO क्राउड फंडिंग कर रही है।  (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
पटना का अयांष स्पाइनल मस्कुलर एस्ट्राफी (SMA) नामक बीमारी से पीड़ित है। इसे 16 करोड़ के इंजेक्शन की जरूरत है जिसके लिए एक NGO क्राउड फंडिंग कर रही है। (फाइल फोटो)

स्पाइनल मस्कुलर एस्ट्राफी (SMA) बीमारी से पीड़ित पटना के 10 माह के मासूम को बचाने के लिए बिहार में चल रहे मुहिम में अब एक नया मोड़ आया है। बेटे आयांश के इलाज के लिये पिता आलोक सिंह जेल चले गए हैं। रांची में 10 साल पुराने एक फ्रॉड केस में उन्होंने रांची के सिविल कोर्ड में सरेंडर कर दिया है। जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है।

वे मंगलवार को पटना से रांची जर्नलिस्ट के साथ आए। सरेंडर करने से पहले अपना इंटरव्यू दिया। इसमें उन्होंने कहा है कि इसके लिये उन्हें किसी प्रकार का दबाव नहीं था। उन्होंने स्वेच्छा से सरेंडर किया है। आलोक ने कहा कि वे तबतक जेल में रहेंगे जबतक आयांश को इंजेक्शन नहीं लग जाता है।

ताकि लोगों को यकीन हो हम विदेश नहीं भागेंगे
आयांश के पिता ने बताया कि उनके बेटे के इलाज के लिए जमा हो रहे क्राउड फंडिग पर कुछ लोग सवाल खड़ा कर रहे हैं। कह रहे हैं कि बेटे की बीमारी का बहाना बनाकर पैसे की जुगाड़ कर रहे हैं। हम पैसे लेकर विदेश चले जायेंगे। लोग यह भी कर रहे हैं कि बेटे की झूठी बीमारी का बहाना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसीलिए जेल जा रहा हूं। जब तक बेटे को इंजेक्शन नहीं लग जाता बेल भी फाइल नहीं करुंगा, ताकि लोगों को यकीन हो सके।

जमीन, जायदाद बिक गए गहनें तक गिरवी हैं
आलोक ने बताया कि आयांश के इलाज के लिये 5-6 माह पहले पांच कट्ठा जमीन बेच दिया हूं। इससे संबंधित दस्तावेज को सार्वजनिक कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं अपना और अपनी पत्नी के गहनें भी गिरवी रख दिया हूं। मेरा ITI इंस्टीट्यूट भी है जो पिछले दो साल से बंद है। 10-15 लाख रुपये की लागत से इंस्टीट्यूट खोला हूं, कोई चाहे तो खरीद ले, ताकि मेरे बच्चो को सुई लग सके।

किस मामले में गए हैं जेल
आलोक सिंह 10 साल पहले रांची में मर्चेंट नेवी का इंस्टीट्यूट चलाते थे। यहां गलत तरीके और झूठी जानकारी देकर बच्चों का एडमिशन कराते थे। बच्चों के साथ फर्जीवाड़ा कर रहे थे। बड़ी संख्या में बच्चों ने आलोक सिंह के खिलाफ पंडरा थाने में कंप्लेन दर्ज कराया था। तब से ये फरार चल रहे थे।

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