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बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर विशेष:पोता गांव में बिस्कुट बेचकर करते हैं गुजारा तो परपोती सब्जी बेचकर पढ़ाई का खर्च निकालती है, वादा कर 8 सालों में भी सम्मानजनक नौकरी नहीं दे सकी सरकार

रांची/खूंटी2 महीने पहले
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बिरसा मुंडा की परपोती अपनी पिता की उगाई सब्जी को खूंटी में बेचकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
बिरसा मुंडा की परपोती अपनी पिता की उगाई सब्जी को खूंटी में बेचकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है। (फाइल फोटो)

झारखंड के भगवान कहे जाने वाले धरती-आबा बिरसा मुंडा के नाम पर राजनेता हर चुनाव में राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। लेकिन जब काम करने का मौका मिलता है तो भूल जाते हैं। यही कारण है कि उनके वंशज आज भी सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 82 वर्ष के पोते गांव में टॉफी और बिस्कुट बेच कर अपना गुजारा कर रहे हैं तो परपोती हाट में सब्जी बेचकर पढ़ाई पूरी कर रही है। पोस्ट ग्रेजुएट परपोते कानू मुंडा को सरकारी दफ्तर में चपरासी की नौकरी दी गई है।

कानू मुंडा ने बताया कि वे खूंटी के SDO ऑफिस में लोगों को पानी पिलाने का काम करते हैं। सम्मान की बता करने वाली सरकारों को 8 साल में वे कई बार कह चुके हैं कि कम से कम सम्मानजनक पद तो दे दीजिए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला है।

बिरसा मुंडा के पोते सुखराम मुंडा 82 साल की उम्र में भी खेतों में कुदाल चलाने के लिए मजबूर हैं।
बिरसा मुंडा के पोते सुखराम मुंडा 82 साल की उम्र में भी खेतों में कुदाल चलाने के लिए मजबूर हैं।

प्रोफेसर की नौकरी कर सकता हूंः कानू मुंडा

कानू मुंडा ने बताया कि मुंडारी भाषा में पीजी की पढ़ाई किया हूं। रांची यूनिवर्सिटी के विभिन्न कॉलेजों में इसकी पढ़ाई भी शुरू हो गई है। अगर सरकार चाहे तो मैं कॉलेजों में इन बच्चों को मुंडारी पढ़ा सकता हूं। लेकिन सरकार की मंशा ही नहीं है।

पीजी तक की पढ़ाई करने के बाद भी बिरसा मुंडा के परपोते कानू मुंडा सरकारी कार्यालय में लोगों को पानी पिलाने के लिए मजबूर हैं।
पीजी तक की पढ़ाई करने के बाद भी बिरसा मुंडा के परपोते कानू मुंडा सरकारी कार्यालय में लोगों को पानी पिलाने के लिए मजबूर हैं।

वंशज हूं, किसको बताना अच्छा नहीं लगता

बिरसा मुंडा की परपोती अपनी पिता की उगाई सब्जी को खूंटी में बेचकर पढ़ाई पूरी कर रही है। वे खूंटी के बिरसा कॉलेज में ग्रेजुएशन पार्ट-3 की स्टूडेंट है। कहती हैं अभी तक किसी प्रकार की छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिला है। पिता की उगाई सब्जियों को साइकिल से बाजार हाट में ले जाकर बेचती हूं। वे कहती हैं कि किसी को बताने से बचती हूं कि वे बिरसा मुंडा की वंशज है।

3 कमरे के एस्टबेस्ट के मकान में 14 लोगों का परिवार रहता है

बिरसा मुंडा के पोते सुखराम मुंडा कहते हैं कि सरकारी मदद के रूप में हर महीने 1000 रुपए की वृद्धा पेंशन मिलती है। शहीद ग्राम विकास योजना की शुरुआत 2017 में उनके गांव से ही की गई, लेकिन अभी तक उन्हें इसका लाभ नहीं मिला है। बिरसा मुंडा के नाम पर आम बागवानी योजना की शुरुआत की गई है, लेकिन उनकी जमीन पर एक पौधा नहीं लग सका है। उन्होंने बताया कि तीन कमरे के एस्बेस्टस में 14 लोगों का परिवार रहता है।

बिरसा मुंडा का वंशज आज भी चुएं का पानी पी रहा है। परपोते की बहू गांगी मुंडा रोज चुआं से पानी घर ले जाती है।
बिरसा मुंडा का वंशज आज भी चुएं का पानी पी रहा है। परपोते की बहू गांगी मुंडा रोज चुआं से पानी घर ले जाती है।

चुआं का पानी पीते हैं बिरसा के वंशज

बिरसा मुंडा के परपोते की बहू गांगी मुंडा ने बताया कि नेताओं को बस दो ही मौके पर बिरसा मुंडा याद आते हैं। 9 जून को शहादत दिवस पर और 15 नवंबर को जयंती पर। पिछले एक साल से धरती आबा के वंशज चुआं का पानी पीते हैं, लेकिन किसी ने खोज खबर नहीं ली। गांगी कहती हैं कि नल से पानी आता नहीं। साल भर से सोलर संचालित जलापूर्ति ठप है। पूरा गांव प्रदूषित पानी ही पी रहा है।

हम बिरसा के वंशजों को सम्मान जरूर देंगे : सत्ता पक्ष

सत्ताधारी कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के वंंशजों को जो सम्मान मिलना चाहिए वो अब तक नहीं मिल पाया है। यह बहुत ही दुखद है। झारखंड में अबुआ सरकार आई है जो आदिवासी, मूलवासी व समस्त लोगों को साथ लेकर चलने में सक्षम है। निश्चित रूप से भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों को सम्मान मिलेगा।

दुर्भाग्यपूर्ण है, CM से निवेदन करता हूं कि वे सम्मान दें : विपक्ष

BJP के प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा संसद दीपक प्रकाश ने कहा कि ये दुर्भाग्य है। हमारी सत्ता और सरकार जब भी रही भगवान बिरसा को सम्मान दिया। अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री थे तब संसद के सेंट्रल हॉल में बिरसा मुंडा जी की मूर्ति लगाई गई। इनके जन्मस्थान उलिहातू का विकास बीजेपी ने किया। इस सरकार से आग्रह करता हूं वो उनके वंशजों का सम्मान दें।

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