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गुमनाम तालाब:1930 तक था 335 साल पुराना तालाब, इसके जल से चुटिया राम मंदिर में पूजा होती थी; उसे भी समतल कर दिया

रांची6 दिन पहले
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  • रिकाॅर्ड में 100 तालाब का जिक्र, पर 40 का ही अस्तित्व
  • निगम के दस्तावेज में 100 तालाब, पर विवरण नहीं, अब सर्वे होगा
  • हम बता रहे हैं 14 तालाबों का डिटेल जो खत्म हो गए

रांची कभी ताल-तलैया के शहर के नाम से जानी जाती थी। प्रसिद्ध लेखक श्रवण कुमार गाेस्वामी ने अपनी किताब ‘रांची तब और अब’ में लिखा है कि अंग्रेजी हुकूमत के समय रांची में 400 से अधिक छोटे-बड़े तालाब थे, पर अब सिर्फ 40 हैं। तालाबों को भरकर बेचने का जो सिलसिला दो-तीन दशक पहले शुरू हुआ, वह आज भी जारी है। निजी तालाबों को तो बेचा ही गया, नदी-डैमों पर भी अतिक्रमण हो गया। लगभग 14 तालाब समतल कर दिए गए और उसपर अपार्टमेंट खड़ा कर दिया। पांच का तो ऐितहासिक महत्व था।

इनमें से एक गोसाईं तालाब है। 335 साल पहले इस तालाब के पानी से चुटिया के राम मंदिर में पूजा हाेती थी। अब यह मैदान बन गया है। यह मंदिर छाेटानागपुर के पहले नागवंशी राजा रघुनाथ नरेन्द्र शाहदेव के महल का हिस्सा था। इस महल से ही जुड़ा था राधा कुंड। कुंड में रानियां स्नान करती थीं और जल लेकर राम मंदिर में पूजा करती थीं। कुंड से 400 मीटर दूर गोसाईं तालाब का पानी यहां आता था। यहां गुफाएं बनीं थीं जिसके हाेकर रानियां वापस महल में जाती थीं। पर, आज यह तालाब अतिक्रमित है। तालाब सूखने लगा ताे मंदिर परिसर में बना राधा कुंड भी सूख गया। तालाब का जितना क्षेत्र बचा है वह दलदल बन गया है।

1. घास का यह मैदान कभी गोसाईं तालाब हुआ करता था, यहीं के पानी से राम मंदिर में पूजा हाेती थी

श्री राम मंदिर चुटिया के महंत बाबा गोकुल दास ने बताया कि चुटिया में कभी 21 तालाब थे, पर अब महज 10 ही बचे हैं। गोसाईं तालाब का पानी कभी राधा कुंड में आता था। उसी पानी से मंदिर में पूजा-अर्चना हाेती थी। नागवंशी राजा के समय तालाब में नहाने के लिए गुफा का प्रयाेग हाेता था, जो बाद में बंद कर दिया गया। तालाब का अतिक्रमण हाे गया ताे राधा कुंड भी सूख गया। तालाब का जो हिस्सा बचा है वह भी मैदान बन गया है। उसमें जंगली घास उग गई हैं। बीच में तालाब रह गया है और चारों ओर लगभग घर बन गया है।

2. कैदियों ने खोदा था विलिकिन्सन तालाब

कचहरी रोड में अंग्रेज अधिकारी विलिकिन्सन ने रांची जेल के कैदियों से इसे खुदवाया था। इसमें काफी लोग डूबते थे। हल्ला फैला कि तालाब लोगों को खींचता है। इसे भूतहा कहा जाने लगा। बाद में कमिश्नर एनजीडीजे राव ने इसे भरकर स्टेडियम बना दिया। 3 वर्ष पूर्व इसके एक हिस्से में वेंडर मार्केट बना।

3. पुण्य कमाने को बना था तिवारी तालाब

एमजी राेड पर मल्लाह टाेली व ग्वाला टाेली के बीच यह तालाब था। बुधिया परिवार ने इसे खुदवाया था। जब तालाब पाटना शुरू हुआ तो किसी को विश्वास नहीं हुआ। क्योंकि इसे पुण्य कमाने के लिए खुदवाया गया था। जब राधाकृष्ण बुधिया की कार दुर्घटना में मौत हुई तो लोगों ने उसे तालाब भरने से जोड़ दिया।

4. निगम ने कोर्ट में जमा किया 1929-30 का सर्वे मैप

8 अप्रैल की सुनवाई से पहले बुधवार को निगम ने सर्वे मैप हाईकोर्ट में जमा किया। हाईकोर्ट ने वर्ष 1928-29 के म्यूनिसिपल सर्वे के अनुसार रांची का नक्शा व जलस्रोत की जानकारी मांगी है। निगम ने प्रशासन से 25400 रु. देकर सर्वे मैप खरीदा है। मैप में 100 तालाब-पोखर, नदी का उल्लेख है।

5. डिस्टिलरी तालाब

पहले अतिक्रमण से नाला बना। अब एक ओर रांची नगर निगम ने पार्क बना दिया तो दूसरी ओर सब्जी मार्केट। अब यहां पानी का स्रोत पूरी तरह बंद हो गया है।

6. आईटीआई तालाब

हेहल क्षेत्र में 40 साल पहले यह प्रसिद्ध तालाब था। अब यहां आईटीआई पावर सबस्टेशन बन गया है। साथ ही अगल बगल कई पक्के मकान बन गए हैं।

7. वाजपेयी पथ तालाब

हिनू रजिस्ट्री ऑफिस से आगे वाजपेयी पथ पर यह तालाब था। इसे भी भरकर बेच दिया और यहां बहुमंजिली इमारतें बन गईं।

8. हुंडरू तालाब

जमीन दलालों ने तालाब के एक किनारे को मिट्‌टी से भरकर जमीन बेच दी। अब यहां कई घर बन गए हैं। जमीन बेचना जारी है।

9. मधुकम तालाब

मधुकम बस्ती में छोटे-छोटे दो निजी तालाब थे। मालिकों ने भरकर बेच दिया। नतीजा है कि गर्मी में बोरवेल सूख जाते हैं।

10. कांटाटोली तालाब

कांटाटोली-कोकर रोड पर इस तालाब को भरकर अपार्टमेंट बना दिया गया है।

11. ईस्ट जेल रोड तालाब

90 के दशक तक यहां तालाब हुआ करता था। दो दशक पहले इसे मिट्‌टी से भर दिया गया। अब यहां ऊंची-ऊंची इमारतें हैं।

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