इस पानी में जहर है, दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट:जल त्रासदी की ओर बढ़ रहा है झारखंड, भास्कर टीम ने 15 दिन की यात्रा से जुटाए चौंकाने वाले तथ्य

रांची6 दिन पहले
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साहिबगंज में गंगा नदी शहर के दाे किमी अंदर तक घुस गई है - Dainik Bhaskar
साहिबगंज में गंगा नदी शहर के दाे किमी अंदर तक घुस गई है

झारखंड के पानी में तेजी से जहर घुल रहा है। जानलेवा आर्सेनिक-फ्लोराइड का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। साहिबगंज में गंगा किनारे के 58 गांवों में इसके कारण कैंसर फैल रहा है। इससे 500 परिवार वाले एक ही गांव में लगभग 30 से अधिक मौतें अब तक हो चुकी है। इसका कारण है राज्य में तेजी हो रहा अवैध खनन और उद्योगों से फैलने वाला प्रदूषण।

इसकी सच्चाई की पड़ताल करने दैनिक भास्कर के रिपोर्टर पंकज त्रिपाठी और फोटो जर्नलिस्ट संदीप नाग की टीम संताल के जिले साहिबगंज के डिहरी गांव पहुंची। यहां पिछले पांच साल में कैंसर से 30 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। भारतीय सेना से रिटायर होकर गांव में रहने आए गंगा सागर यादव ने बताया, 'मैं गांव का अकेला खुशनसीब हूं कि पत्नी 13 साल से कैंसर से पीड़ित हैं, पर अभी तक ठीक हैं।'

उन्होंने बताया, 'गांव के हर घर में लोग बीमार हैं। किसी को कैंसर तो किसी को गंभीर चर्म रोग है। इसका कारण है पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन की बेहिसाब मात्रा। गंगा किनारे बसे 78 गांवों में से 58 में इसका प्रकोप देखा जा सकता है। आर्सेनिक के लगातार संपर्क में आने से यहां के लोगों को त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियां हो रही हैं।'

त्रासदी के लिए व्यवस्था जिम्मेदार, क्योंकि...

1. आर्सेनिक और फ्लोराइड बढ़ने से नहीं रोका जा रहा

  • आर्सेनिक और फ्लोराइड का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। साहिबगंज में गंगा किनारे के 58 गांवों में इससे कैंसर फैल रहा है। 500 परिवार वाले एक ही गांव में 30 से अधिक मौतें हो चुकी है। खनन-प्रदूषण से आर्सेनिक बढ़ रहा है।

2. दूषित पानी पीने से औसत उम्र 14 साल तक घट गई

  • पहाड़ों पर पानी खत्म हो रहा है। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की जा रही है। दूषित पानी पीने से संथाल में राजमहल पहाड़ी पर बसे 500 से अधिक गांवों में पहाड़िया लोगों की औसत उम्र 14 साल घट गई है।
डिहरी गांव की महिलाओं ने घरों में बन रहा लाल निशान दिखाया। आर्सेनिक से घर में जहर फैल रहा है। बर्तनों में भी आर्सेनिक का गाद जम जा रहा है।
डिहरी गांव की महिलाओं ने घरों में बन रहा लाल निशान दिखाया। आर्सेनिक से घर में जहर फैल रहा है। बर्तनों में भी आर्सेनिक का गाद जम जा रहा है।

नवजात की मृत्यु का खतरा 6 गुना तक बढ़ा

पानी में घुलते जा रहे जहर न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका संबंधी) और रिप्रोडक्टिव सिस्टम को प्रभावित करने के अलावा हृदय संबंधी समस्या, डायबिटीज, श्वसन और गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल रोग व कैंसर का कारण बन रहे हैं। गर्भावस्था में आर्सेनिक की उच्च सांद्रता के चलते गर्भपात, जन्म के समय बच्चे के वजन का कम होना और नवजात की मृत्यु का जोखिम छह गुना यहां बढ़ गया है।

मानसून के दूसरे महीने में ही नदियां सूखे लगी हैं।
मानसून के दूसरे महीने में ही नदियां सूखे लगी हैं।

पानी की किल्लत के कारण पुश्तैनी घर बेच रहे हैं लोग

झारखंड के 12 जिलों के पॉश इलाके-मुहल्ले ड्राइजोन में आ रहे हैं। प्रदेश की 30% आबादी ‘डे जीरो’ की ओर बढ़ रही। मानसून के दो माह बाद ही नदियां सूख जा रहीं हैं। इलाका ड्राइजोन बनता जा रहा है। पानी के किल्लत के कारण लोग गांव का घर बेचकर शहरों की ओर जाने लगे हैं। पलामू और गढ़वा में हर दो-तीन साल में सूखा पड़ता है और दस साल में अकाल। इसके बावजूद जल संकट से निपटने की न तो कोई बड़ी योजना पूरी हुई और न ही किसी दूसरे विकल्पों पर काम हुआ।

2030 तक धनबाद, जमशेदपुर में समाप्त हो जाएगा पीने का पानी

14 जिले के सफर में हमें 12 जिलों- रांची, पू. सिंहभूम, पलामू, गढ़वा, लोहरदगा, लातेहार, चतरा, हजारीबाग, धनबाद, दुमका, पाकुड़, साहिबगंज आदि के कई इलाकों के लोगों ने ड्राइजोन में रहने की जानकारी दी। हमारी यात्रा के अनुसार, राज्य की 30% आबादी डे जीरो की ओर बढ़ रही है। नीति आयोग ने भी चेताया है कि 2030 तक धनबाद, जमशेदपुर डे जीरो हो जाएंगे। नीति आयोग की इसी रिपोर्ट के अनुसार लगभग 40% लोगों की पहुंच पीने के पानी तक खत्म हो जाएगा।

पाइपलाइन बिछाने की योजना में भी लापरवाही

रेड़मा के रहने वाले अखिलेश तिवारी ने बताया, 'डाल्टनगंज में पिछले पांच साल में पानी की समस्या विकराल हो गई है। शहर में पाइपलाइन तो बिछाई गई है, पर इससे बहुत कम लोगों को पानी मिल रहा है, वह भी थोड़ी देर के लिए। पांकी रोड में कई मकान आधे अधूरे बने हैं। पानी का संकट हो गया तो सब वैसे ही पड़े हैं। कोयल नदी में इस बार तो दिसंबर तक पानी है, पर पिछले साल अक्टूबर में यह सूखने लगी थी।'

30 साल बाद गंगा ने बदला रास्ता

परेशानी केवल इतनी ही नहीं है। इधर, साहिबगंज में 30 साल बाद फिर मां गंगा अपने पुराने मार्ग पर लौट रही हैं। इसके कारण वह दो किमी तक शहर में घुस गई है। तेजी से मिट्‌टी के कटाव के कारण पुराने साहिबगंज के सैकड़ों घर कभी भी गंगा में समा सकते हैं। आठ वर्ष पहले पश्चिमी मुहाना बंद होने से एक झील बन गया था। इसके बाद इस वर्ष गंगा ने फिर अपना स्वरूप बदल दिया है।

मंत्री ने कहा- लोग भी सोचें, वरना आने वाली पीढ़ियां बूंद-बूंद को तरसेंगी

झारखंड के पेयजल आपूर्ति मंत्री मिथलेश ठाकुर ने दैनिक भास्कर से कहा, 'झारखंड की भौगोलिक स्थिति के कारण जल संकट बढ़ रहा है। इस पर सरकार गंभीर है। लोग भी सोचें, वरना आने वाली पीढ़ियां बूंद-बूंद को तरसेंगी। हमारी नीति है कि सरफेस वाटर का उपयोग ही पेयजल के लिए हो। जहां सरफेस वाटर अधिक है, वहां से हम पानी लाएंगे और उसका ट्रीटमेंट करने के बाद उसे पाइपलाइन के माध्यम से लोगों के घरों तक पहुंचाएंगे। इससे आर्सेनिक और फ्लोराइड से होने वाली बीमारियों से राहत मिलेगी।'