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रोजगार की कवायद:दावा... 2.70 लाख प्रवासी मनरेगा में मजदूरी को राजी, 81 हजार चाहते हैं हुनर का काम

रांचीएक महीने पहले
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  • 5.47 लाख प्रवासी झारखंड लौटे, अब तक 3.60 लाख का हुआ सर्वे
  • सरकार का प्रयास... ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को मनरेगा से रोजगार दिए जाएं
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बिनोद ओझा, कोरोना संक्रमण की वजह से पूरे देश में लागू लॉकडाउन की वजह से 5.47 लाख प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों से झारखंड स्थित अपने घर लौट चुके हैं। ग्रामीण विकास विभाग इन्हें रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से इनका सर्वे करा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार मनरेगा में ही ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। झारखंड लौट चुके करीब 3.60 लाख 920 प्रवासी मजदूरों के सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया गया है।

इनमें 2.70 लाख मजदूर ऐसे हैं, जो मनरेगा योजना में काम करने के लिए तैयार हैं। सर्वे में यह पाया गया कि 1.89 लाख 66 मजदूरों के पास मनरेगा का जॉब कार्ड जबकि 2.15 लाख 690 मजदूरों के पास जन धन बैंक अकाउंट नहीं है। अब तक जिन मजदूरों के सर्वे का काम पूरा हो चुका है, उनमें 2.22 लाख कुशल जबकि 1.13 लाख अकुशल मजदूर हैं। इनमें से 1.32 लाख मजदूराें ने कृषि क्षेत्र में काम करने की इच्छा जताई है। जबकि 81 हजार तकनीकी ज्ञान और कौशल आधारित काम से जुड़ना चाहते हैं। 44745 मजदूर ऐसे हैं जो स्वरोजगार करना चाहते हैं। इसके अलावा 48056 मजदूर ऐसे हैं, जो पशुपालन के क्षेत्र में काम चाहते हैं।

2.15 लाख के पास जन धन बैंक अकाउंट नहीं

सरकारी योजनाओं के योग्य हाेने के बाद भी नहीं मिली सुविधा

सर्वे किए गए 3.60 लाख 920 मजदूरों में से 1.62 लाख 271 ऐसे हैं, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। इसी तरह 17593 मजदूरों को वृद्धावस्था पेंशन और 6941 को विधवा पेंशन, 3661 को दिव्यांग पेंशन, 78515 को आयुष्मान भारत कार्ड नहीं है। इसी तरह 21472 को जीवन ज्योति बीमा व 20916 को अटल पेंशन योजना से नहीं जोड़ा जा सका है या वह नहीं जुड़ पाए हैं।

ग्रामीण विकास विभाग ने मजदूरों के आने से पहले ही तैयार किया था ब्लूप्रिंट

प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने पहले ही अपना ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया था। उसी रणनीति के तहत इन्हें मनरेगा से जोड़ने का काम शुरू किया गया है। पिछले साल के आंकड़े के अनुसार झारखंड में करीब 49 लाख ग्रामीण परिवार जॉब कार्ड होल्डर हैं। एक्टिव जॉब कार्ड करीब 22 लाख परिवार के पास है। एक्टिव मजदूर करीब 29 लाख हैं।

पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा में औसतन 45 दिनों का मिला काम

मनरेगा के तहत एक परिवार को साल में 100 दिन काम मुहैया कराना होता है। झारखंड में पिछले साल करीब 45 दिन औसतन सभी मजदूरों को झारखंड में काम मिला है।

क्या है सर्वे की रिपोर्ट...

2.22 लाख कुशल जबकि 1.13 लाख अकुशल मजदूर

44745 मजदूर ऐसे... जो स्वरोजगार करना चाहते हैं 

48056 मजदूर पशुपालन के क्षेत्र में काम चाहते हैं

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