ओमिक्रॉन की तैयारी पर रांची से ग्राउंड रिपोर्ट:10 दिन में मिल रही है जीनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट, RIMS में सीरियस मरीजों के लिए 150 और एसिम्प्टोमैटिक मरीजों के लिए 100 बेड तैयार

रांचीएक महीने पहले
RIMS के न्यू पार्किंग बिल्डिंग में 100 बेड माइल्ड सिम्प्टम के मरीजों के लिए तैयार किए गए हैं।

कोविड का नया रूप ओमिक्रॉन देश के विभिन्न राज्यों में दस्तक दे चुका है। इसे कोरोना की तीसरी लहर के रूप में देखा जा रहा है। इससे बचाव के लिए झारखंड में भी तैयारियां शुरू हो गई है। स्थितियां अचानक न बिगड़े इसके लिए एहतियातन RIMS में फिलहाल 250 बेड तैयार किए गए हैं। इसमें 150 बेड सीरियस मरीज के लिए और 100 बेड एसिम्प्टोमैटिक मरीज के लिए तैयार किए गए हैं।

वहीं दूसरी तरफ ओमिक्रॉन की जांच के लिए अभी तक राज्य में कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। फिलहाल यहां से सीरीयस मरीज के सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए उड़ीसा के लैब में भेजा जा रहा है। वहां से रिपोर्ट आने में 7-10 दिन का समय लग रहा है। हालांकि फिलहाल झारखंड में ओमीक्रॉम के एक भी केस की पुष्टी नहीं हुई है ।

RIMS के ट्रामा सेंटर सह व क्रिटिकल केयर के इंचार्ज प्रदीप भट्‌टाचार्य ने दैनिक भास्कर को बताया कि प्रदीप भट्‌टाचार्य ने बताया कि झारखंड ने बेदह ही बुरी स्थिति से उबरा है। इसलिए घबराने की जरुरत नहीं है। RIMS का ट्रामा सेंटर पूरी तरह तैयार है। यहां 100-150 मरीजों को आसानी से वेंटीलेटर तक का इलाज दिया जा सकता है।

RIMS के ट्रामा सेंटर में गंभीर मरीजों के लिए बेड तैयार किए गए हैं।
RIMS के ट्रामा सेंटर में गंभीर मरीजों के लिए बेड तैयार किए गए हैं।

जांच के साथ क्लिनिकल कंडीशन का अध्ययन भी जरूरी
ओमीक्रॉम के खतरे के सवाल पर प्रदीप भट्‌टाचार्य कहते हैं कि जांच और जांच के साथ मरीज का क्लिनिकल कंडीशन दोनों को देखना बहुत जरूरी है। ओमिक्रॉन के बाद भी हालात अगर हॉस्पिटल और वेंटीलेटर तक जाने के पैदा नहीं होते हैं तो घबराने की जरुरत नहीं है। हमें इस बात का ख्याल रखना है कि कितनी संख्या में लोग अफेक्टेड हो रहे हैं और कितने लोगों को ऑक्सीजन थीरेपी और वेंटीलेटर की जरूरत पड़ रही है।

दूसरे वेब के बाद से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थी
RIMS के PRO डॉ. डीके सिन्हा ने दैनिक भास्कर को बताया कि कोविड के तीसरे वेब की आशंकाओं से ही तैयारी शुरू कर दी गई थी। RIMS में दो कोविड सेंटर बनाए गए हैं। सीरियस मरीज के इलाज के लिए न्यू ट्रामा सेंटर को डेडिकेटेड कोविड सेंटर बनाया गया है अस्थाई कोविड वार्ड में 100 से अधिक बेड तैयार किए गए हैं। यहां एसेम्पोट्मेटिक और माइल्ड सिंप्टम मरीज का इलाज किया जाएगा। इसके साथ ही RIMS के मेडिसीन विभाग में भी दो वार्ड को कोविड मरीजों के लिए तैयार रखा गया है।

RIMS में जीनोम सिक्वेंसिंग जांच जल्द
डॉ. डीके सिन्हा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जल्द RIMS मे जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन लगाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि इससे केवल कोविड का ही नहीं बल्कि अन्य वायरस के भी जीनोम का अंदाजा लगाया जा सकता है। फिलहाल सस्सपेक्टेड मरीजों के सैंपल को दूसरे राज्यों के लैब में भेजा जा रहा है।

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