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झारखंड सरकार को SC का नोटिस:कोर्ट का सवाल-जब 5 साल बाद परीक्षा हो रही है, तो क्या वह अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में एक बार छूट दे सकती है, 19 को परीक्षा, 21 को होगी अगली सुनवाई

रांचीएक महीने पहले
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हाईकोर्ट में सरकार के उम्र सीमा के निर्धारण को चुनौती दी गयी थी। इसमें प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया था कि  नियमानुसार जेपीएससी को हर साल परीक्षा आयोजित करनी थी। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट में सरकार के उम्र सीमा के निर्धारण को चुनौती दी गयी थी। इसमें प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया था कि  नियमानुसार जेपीएससी को हर साल परीक्षा आयोजित करनी थी। (फाइल फोटो)

JPSC की सातवीं सिविल परीक्षा से पहले सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। सोमवार को उम्र सीमा के निर्धारण के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस जारी किया है। जस्टिस एमआर शाह व जस्टिस ए एस बोपन्ना की अदालत ने सरकार से पूछा है कि जब पांच साल बाद परीक्षा हो रही है, तो क्या वह अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में एक बार छूट दे सकती है?

सरकार को 21 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश अदालत ने दिया है। उसी दिन इसकी अगली सुनवाई भी होनी है। जबकि । सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा 19 सितंबर को प्रस्तावित है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका में सुनवाई हुई जिसमें सरकार के उम्र सीमा निर्धारण को सही बताया गया है। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ चार से अधिक अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी है

आदेश से नियमों के प्रावधानों को नहीं बदला जा सकता है
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रार्थी रीना कुमारी ,अमित कुमार सहित अन्य की याचिका पर पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने नियमावली बनाने से पूर्व के पदों को भी नए विज्ञापन में शामिल कर लिया है। नए विज्ञापन में उम्र सीमा का निर्धारण नए तरीके से लागू है। सरकार ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर नियमों को बदला है। आधिकारिक आदेश से नियमों के प्रावधानों को नहीं बदला जा सकता है। जेपीएससी 21 सालों में सिर्फ छह परीक्षाएं ही ले पाया है। इस परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को काफी उम्मीदें थी जो पूरी नहीं हो रहा है। इस पर कोर्ट ने मौखिक कहा कि हम आपकी परेशानी समझ रहे हैं, लेकिन निर्धारण सरकार का निर्णय है।

हाईकोर्ट ने सरकार के निर्णय को सही बताया
हाईकोर्ट में सरकार के उम्र सीमा के निर्धारण को चुनौती दी गयी थी। इसमें प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया था कि नियमानुसार जेपीएससी को हर साल परीक्षा आयोजित करनी थी। पूर्व में जेपीएससी की ओर से निकाले गए विज्ञापन में उम्र का निर्धारण वर्ष 2011 रखा गया था। लेकिन इसे वापस लेते हुए दोबारा संशोधित विज्ञापन जारी किया गया। जिसमें उम्र के निर्धारण वर्ष 2016 कर दिया गया। 5 वर्ष उम्र अधिक होने की वजह से हजारों अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।

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